“घटनाएं मानव के लिये प्रमाणित एवं प्रामाणिक होने के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं। प्रामाणिकता अनुभव है। प्रमाण शिक्षा है। प्रत्येक दुर्घटना में भी एक सद्घटना की कल्पना, कामना, आकाँक्षा एवं आवश्यकता का मानव में प्रादुर्भाव होना पाया जाता है। यही ऐतिहासिकता के लिए भी प्रेरणा है। यह स्पष्ट है कि इतिहास का गौरव मानवीयता में ही संभव है अन्यथा असंभव है। मानवीयता में इतिहास सहज सुलभ परम्परा है। सही, न्याय, निरोग एवं अनुकूल वातावरण, सामान्य गति एवं स्वभाव गति, महत्वाकाँक्षा एवं सामान्यकाँक्षा, अभयता एवं स्वतंत्रता, भाव एवं ज्ञान, सम्मान एवं आदर, सह-अस्तित्व एवं समृद्धि, सत्य एवं धर्म तथा निर्भ्रांति एवं समाधान इन्हीं का इतिहास, प्रमाण एवं परम्परा प्रसिद्ध है। ये सब मानव में व्यक्तित्व एवं प्रतिभा में पाये जाने वाले अविभाज्य तथ्य हैं। इस प्रकार शुद्धत: व्यक्तित्व एवं प्रतिभा का ही इतिहास होता है।”
श्री ए. नागराज जी
अभ्यासदर्शन
मध्यस्थ दर्शन (सह-अस्तित्ववाद) -[एक विकल्प ]