समझ और आचरण
मानव-चेतना संबंधी ज्ञान हमको समझ में आए और आचरण में नहीं आए ऐसा हो नहीं सकता। हम समझदार हो और भीख मांग कर खाएँ, ऐसा हो नहीं सकता। हम समझदार हो और दूसरों का शोषण करें ऐसा हो नही सकता। हम समझदार हो और धरती का शोषण करे ऐसा नहीं सकता।
मानव-चेतना संबंधी ज्ञान यदी हमको समझ आता है तो वह “मानवीयतापूर्ण आचरण” के रुप में प्रमाणित होता है। मानवीयतापूर्ण आचरण “मूल्य-चरित्र-नैतिकता” का संयूक्त स्वरुप है। यह “परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था” के रुप में प्रमाणित होता है।
समझ में आया तो आचरण में आएगा ही।
आचरण में नहीं आया, तो समझ में आया नहीं।
ए. नागराज जी (अगस्त, 2006, अमरकंटक)