🏳🌈स्वतन्त्रता वास्तव में क्या है?🏳🌈
“स्वतन्त्रता” शब्द से भास होता है, मानव ऐसा भी कर सकता है, वैसा भी कर सकता है। इस तरह मनमानी करने को स्वतन्त्रता मान लिया गया है।
वास्तव में “समझदारी के बाद उत्तरोत्तर और अच्छा करने के बारे में सोचना, प्रमाणित करना ही स्वतन्त्रता है।” उत्तरोत्तर और अच्छा सोचने की जो हमारी ताकत है, वही स्वतन्त्रता है। यह उपकार के साथ जुड़ी रहती है। इस तरह अच्छे से और अच्छा, और अच्छे से और ज्यादा अच्छा की ओर चलने की जो गति है उसको हम कहते हैं “अभ्युदय”। अभ्युदय का तात्विक अर्थ है- “सर्वतोमुखी समाधान”। स्वतन्त्रता का वैभव अभ्युदय में है।
संवाद भाग 2 पेज 60
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