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सुखी होना

सुखी होना

Posted on February 5, 2024

सुखी होना


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सम्बन्ध एवं संपर्क में तारतम्यात्मक व्यवहार पक्ष के आनुषंगिक मानव का, विभिन्न विभूतिपरक एवं स्थितिपरक अध्ययन आवश्यक तथा वांछनीय है। अस्तु, सभी मानव आबाल-वृद्ध निम्न बारह स्थिति में गण्य हैं। ये सभी सुखी होना चाहते हैं। सुख भी नियम से, दुःख भी नियम से होना सिद्ध हुआ है। अतः निम्न बारह स्तर में पाए जाने वाले मानव किन नियम सिद्ध प्रक्रिया द्वारा सुखी होना पाए जाते हैं, उसका स्पष्टीकरण निम्नानुसार है – यह सब व्यवहार सम्बन्ध सम्पर्कात्मक हैं-

  1. बलवान दया पूर्वक सुखी होता है।
  2. बुद्धिमान विवेक तथा विज्ञान पूर्वक सुखी होता है
  3. रूपवान सत्चरित्रता पूर्वक सुखी होता है।
  4. पदवान न्याय पूर्वक सुखी होता है।
  5. धनवान उदारता पूर्वक सुखी होता है।
  6. विद्यार्थी निष्ठा पूर्वक सुखी होता है।
  7. सहयोगी कर्त्तव्य पूर्वक सुखी होता है।
  8. साथी दायित्व पूर्वक सुखी होता है।
  9. तपस्वी संतोष पूर्वक सुखी होता है।
  10. लोक सेवक स्नेह पूर्वक सुखी होता है।
  11. सह-अस्तित्व (ईश्वर) में प्रेम पूर्वक मानव सुखी होता है।
  12. रोगी तथा बालक के साथ आज्ञापालन के रूप में सुखानुभूतियाँ सिद्ध हुई हैं।
    .
    The study of human-being in all aspects and states is necessary and desired for harmony in behaviour in the above described relationships and associations. Therefore, all human-beings in all ages are counted in twelve statuses. All these want to become happy. Happiness as well as Misery happens with a definite law. Therefore, by which law-bound procedure the human-beings in the following twelve states are found to be happy, its clarification is as follows.
  • A mighty person becomes happy with kindness.
  • An intelligent person becomes happy with wisdom and science.
  • A beautiful or handsome person becomes happy with righteous character.
  • A person with societal-rank becomes happy with justice.
  • A wealthy person becomes happy with generosity.
  • A student becomes happy with commitment.
  • An assistant becomes happy with dutifulness .
  • A guide becomes happy by being responsible .
  • A public-servant becomes happy with affection.
  • A human-being becomes happy with love in coexistence.
  • A sick person and a child experiences happiness in the form of obedience.
    .
    संदर्भ: मानव व्यवहार दर्शन (2015), पृ. नंबर: 128-129
    प्रणेता: श्रद्धेय श्री ए. नागराज जी
    English Translation: Rakesh Gupta Bhaiya ji

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मनुष्य यातु देवताम्:
धर्मो सफलताम यातु
नित्यं यातु शुभोदयम्I “

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