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२६ वां वार्षिक जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन २०२४

२६ वां वार्षिक जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन २०२४

Posted on September 15, 2024

२६वां वार्षिक जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन २०२४

सार्वभौमिक व्यवस्था के लिए मानवीय शिक्षा

एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्यः एक विकल्प

८ से १० नवंबर, २०२४

आयोजनकर्ता फैकल्टी ऑफ ट्रांसफरमेटिव एजुकेशन, आत्मीय विश्वविद्यालय, राजकोट, भारत और दिव्य पथ संस्थान, अमरकंटक, मध्य प्रदेश, भारत

आत्मीय विश्वविद्यालय के बारे में:

आत्मीय विश्वविद्यालय राज्य का एक निजी बहु-विषयक विश्वविद्यालय है, जो मूल्य आधारित शिक्षा के माध्यम से विभिन्न विषयों में ज्ञान के सृजन और प्रसार को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। ३० से अधिक वर्षों की शैक्षणिक यात्रा के साथ, २०१८ में, आत्मीय ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के तहत कार्यरत विभिन्न पूर्व संस्थानों को आत्मीय विश्वविद्यालय की छत्रछाया में लाया गया। विश्वविद्यालय अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और पर्याप्त समर्थन सुविधाओं के साथ २३+ एकड़ के विशाल हरे-भरे परिसर में राजकोट शहर के केंद्र में स्थित है।

आत्मीय विश्वविद्यालय शिक्षा में नवीन पद्धतियों को शुरू करने और अपनाने में अग्रणी रहा है। विश्वविद्यालय वर्तमान में विज्ञान, व्यवसाय और वाणिज्य, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य विज्ञान, मानविकी और सामाजिक विज्ञान और परिवर्तनकारी शिक्षा के क्षेत्रों में डिप्लोमा, स्नातक, स्नातकोत्तर, स्नातकोत्तर डिप्लोमा और डॉक्टरेट कार्यक्रम प्रदान करता है। व्यावसायिक कौशल के साथ-साथ विश्वविद्यालय का शिक्षा मॉडल समान रूप से छात्रों के बीच जीवन कौशल (जीवन विद्या-मानव मूल्य) और वैश्विक स्थिरता को स्थापित करने का मार्ग दिखाने पर केंद्रित है।

फैकल्टी ऑफ ट्रांसफरमेटिव एजुकेशन (FOTE) के बारे में:

शिक्षा का अर्थ व्यक्ति में व्यक्ति, परिवार, समाज और प्रकृति की जरूरतों और उसके अंतर्संबंधों को समझने की क्षमता पैदा करना है। केवल ऐसी समग्र शिक्षा ही मानव में गुणात्मक परिवर्तन ला सकती है तथा प्रभावी ढंग से सामंजस्यपूर्ण जीवन और आत्मीयता का सार ला सकती है। आत्मीय विश्वविद्यालय में FOTE, विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों व अन्य गतिविधियों के माध्यम से, इस दृष्टिकोण को प्राप्त करने की दिशा में प्रयास कर रहा है।

विश्वविद्यालय में सह-अस्तित्ववादी दर्शन के अध्ययन की यात्रा २०१४ में शुरू हुई। विश्वविद्यालय ने सभी डिप्लोमा, यूजी और पीजी कार्यक्रमों में अनिवार्य क्रेडिट पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। आगे के अध्ययन और अभ्यास के लिए अन्य वैकल्पिक पाठ्यक्रम भी शुरू किए गए हैं। शिविर, अध्ययन सत्र, परिवार गोष्ठी, सस्टेनेबल उत्पादों को तैयार करना, शोध करना और बढ़ावा देना आदि जैसी कई अन्य गतिविधियाँ भी FOTE द्वारा की जाती हैं। FOTE के स्कूल ऑफ कॉन्शसनेस डेवलपमेंट एंड वैल्यू एजुकेशन में चेतना विकास और मूल्य शिक्षा में (मध्यस्थ दर्शन के आलोक में) पाँच साल का इंटिग्रेटेड पीएचडी कार्यक्रम भी प्रस्तावित किया जा रहा है।

मुख्य संरक्षक

P. P. Tyagvallabh Swamiji President, Atmiya University

संरक्षक

प्रोफेसर शीला रामचन्द्रन प्रो-चांसलर, आत्मीय विश्वविद्यालय

प्रो. (डॉ.) शिव त्रिपाठी कुलपति, आत्मीय विश्वविद्यालय

डॉ. के.डी. लाडवा प्राचार्य, श्री एम.एंड एन.विरानी विज्ञान महाविद्यालय

Ms. Vandanaben Chovatiya (Swastik Didi) Principal, ASVM School

Dr. Sadhan Bhattacharya Chairman, Divya Path Sansthan

संयोजक एवं सह-संयोजक

डॉ. दिव्यांग व्यास रजिस्ट्रार, आत्मीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय अधिवेशन के संयोजक

श्री अजय जैन राष्ट्रीय अधिवेशन के संयोजक

डॉ. आशीष कोठारी निदेशक-सीआरआईटी, आत्मीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय अधिवेशन के सह-संयोजक

श्री जिगर रावल राष्ट्रीय अधिवेशन के सह-संयोजक

श्रीमती चेतना झाला , सदस्य, सीवीएमएस सेल, आत्मीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय अधिवेशन के सह-संयोजक

संचार के लिए पता

चेतना विकास और मूल्य शिक्षा स्कूल, परिवर्तनकारी शिक्षा संकाय (FoTE), आत्मिया विश्वविद्यालय,

योगीधाम गुरुकुल, कालावाड रोड, राजकोट – 360005, गुजरात

+91 84600 13785/98793 72269

vecd@atmiyauni.ac.in atmiyauni.ac.in inf/atmiya university

मध्यस्थ दर्शन के बारे में: (सह-अस्तित्व दर्शन)

आज मानव की स्थिति उन मान्यताओं/समझ का प्रत्यक्ष परिणाम है, जिन्हें हम मानव व्यक्तिगत या सामूहिक रूप से अपने-अपने ‘मानसिकता’ के अनुसार समझते और जीते हैं। ऐसी कल्पना, धारणा, मान्यता या समझ बनने के लिए शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियारों में से एक है। प्रचलित शिक्षा प्रणाली याद रखने और विश्लेषण की विधि के माध्यम से जानकारी और कौशल प्रदान करने में बहुत अच्छी है, लेकिन यह मानव जीवन और मानवीय आचरण के सार्वभौमिक पहलुओं को छूने में विफल रहती है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि शिक्षा की वर्तमान सामग्री और संदर्भ प्रकृति में भौतिकवादी है। इसमें मुख्य रूप से प्रकृति के भौतिक पहलुओं का अध्ययन शामिल है, जो ‘भौतिकवादी’ परिणामों की ओर ले जाता है। परिणामस्वरूप, मानव को भौतिक संपदा संचय करने के लिए आविष्कारों और नवाचारों, आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास, उन्नत तकनीक आदि में महारत हासिल हुई, लेकिन फिर भी यह स्पष्ट रूप से देखा गया है कि भौतिकवादी विकास धरती पर मानव जाति के अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है। इसलिए, वर्तमान में हम समाज के रूप में निम्नलिखित मुद्दों का सामना कर रहे हैं:

  • पर्यावरण क्षरण, संसाधनों की कमी, जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण।
  • व्यक्तिवाद, प्रतिस्पर्धा, तनाव, अवसाद, द्वेष, क्रोध और चिंता।
  • उपभोक्तावाद, सांप्रदायिकता, सामाजिक असमानता और सामाजिक असहिष्णुता।
  • व्यक्तियों में बढ़ती लक्ष्यहीनता और अकेलापन।
  • पारस्परिक संबंधों और पारिवारिक संरचनाओं में टूटन।
  • मानवीय मूल्यों, नैतिकता और सांस्कृतिक विरासत का क्षरण।
  • उत्पादों और सेवाओं की अस्थिर मांग और असीमित खपत।
  • गतिहीन जीवन शैली, मोटापा, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएं।
  • भू राजनीतिक संघर्ष, वैश्विक असमानताएँ और प्रतिक्रियाएं।

श्री ए. नागराज द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन (सह-अस्तित्व दर्शन), मानव चेतना और अस्तित्व के सभी आयामों को उजागर करता है। मध्यस्थ दर्शन, मानव जाति के वर्तमान में होने का सही स्वरूप, व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक और तकनीकी द्वंदों का एक सार्वभौमिक समाधान प्रदान करता है। यह अस्तित्व के नियम पर आधारित एक अनुसंधान है जो ब्रह्मांड की मौलिकता, मानवीय आचरण तथा चेतना विकास व मानव के प्रयोजन का उद्घाटन करती है। इस सह-अस्तित्ववादी दर्शन (सह-अस्तित्ववाद) को मानव जाति के मूल्यांकन और अध्ययन के लिए भौतिकवाद (विज्ञान) और आदर्शवाद /अध्यात्मवाद के ‘विकल्प’ के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

जीवन विद्या अस्तित्व के सभी पहलुओं और मानव के जीने के सभी आयामों पर विस्तृत स्पष्टता के साथ सफल जीवन के लिए अनुभवात्मक, तर्कसंगत, भावनात्मक और व्यावसायिक आयामों को समझने का एक प्रस्ताव है। यह जागृति और चेतना विकास के माध्यम से हमारे बहुआयामी द्वंदों और समस्याओं के लिए मानव के अध्यात्मिक, बौद्धिक, व्यवहारिक और भौतिकवादी संकल्पों को सक्षम करने वाला एक वृहद दृष्टिकोण प्रदान करता है।

पिछले ढाई दशकों से अधिक के दौरान, सैकड़ों कार्यक्रमों के माध्यम से, जीवन विद्या प्रस्ताव ने लाखों प्रतिभागियों को परिवार और समाज के साथ मिल-जुलकर एक उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में मदद की है। आज के वैश्विक अशांति और जटिलताओं के समय में, जीवन विद्या एक सरल और व्यवहारिक समाधान प्रदान करती है। यह मानव को सार्थक, उद्देश्यपूर्ण और शांतिपूर्ण दिशा देने की शक्ति रखती है।

दिव्य पथ संस्थान के बारे में:

१९८१ में स्थापित, मध्यस्थ दर्शन पर आधारित, दिव्य पथ संस्थान (डीपीएस), मानव चेतना में जागृति, मानवता को आगे बढ़ाने, एक अखंड मानव समाज और प्रकृति में संतुलन के उद्देश्य से मौजूद है। दिव्य पथ संस्थान, जीवन विद्या प्रकाशन के नाम से मध्यस्थ दर्शन की सभी पुस्तकें प्रकाशित करता है। इसके अलावा, दिव्यपथ संस्थान के निम्नलिखित कर्तव्य हैं:

नागरिकों, शिक्षाविदों, विद्यार्थियों और उद्योगपतियों आदि के लिए सेमीनार और कार्यशालाएँ आयोजित करना।

मध्यस्थ दर्शन पर शोध को प्रोत्साहित करना।

जीवन विद्या पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन, राष्ट्रीय सम्मेलन और सेमीनार आयोजित करना।

शैक्षणिक संस्थानों और समाज के लिए शिक्षा के मानवीयकरण का प्रस्ताव रखना।

परिवार, समाज और प्रकृति के पोषण सहित जीने के मॉडल (स्वराज्य) का अभ्यास करना।

राष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में:

मध्यस्थ दर्शन के अनुसार सम्मलेन, पूर्णता की ओर ले जाने वाला मिलन है। हर साल जीवन विद्या वार्षिक सम्मेलन इस दर्शन के अध्ययन और अभ्यास में शामिल लोगों के साथ-साथ पिछले कार्यक्रम के प्रतिभागियों में परस्पर जान-पहचान और लगातार विकसित हो रहे अपने निष्कर्षों को साझा करने के लिए आयोजित किया जाता है। इसमें समाज के हर वर्ग के प्रतिभागी शामिल होते हैं, जो अपने-अपने क्षेत्रों में जीवन विद्या की प्रासंगिकता पर सक्रिय रूप से अपने एक्स्पीरिएंस साझा करते हैं। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में सम्मेलन ने समाधानपूर्ण मानव लक्ष्य की खोज में बड़ी संख्या में नए प्रतिभागियों को भी आकर्षित किया है।

२६वां वार्षिक जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन २०२४ (#२६जीवनविद्या) आत्मीय विश्वविद्यालय, राजकोट में आयोजित किया जा रहा है। २०२४ सम्मेलन का विषय ‘सार्वभौमिक व्यवस्था के लिए मानवीय शिक्षा’ है। सह-अस्तित्ववादी दर्शन के आलोक में सम्मेलन के निम्न उद्देश्य हैं:

शिक्षा में मानवीय मूल्यों को एकीकृत करने हेतु वैकल्पिक शैक्षिक नीतियों और ढांचे का प्रस्ताव रखना।

शैक्षणिक प्रणालियों में साक्ष्य-आधारित ज्ञान के प्रसार और अनुभवात्मक शिक्षा की सुविधा प्रदान करना।

  • शैक्षिक कार्यक्रमों में सस्टेनेबल और पर्यावरणीय शिक्षा प्रणाली को प्रोत्साहित करना।

स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानवीय शिक्षा सिद्धांतों को एकीकृत करना।

  • सौहार्दपूर्ण जीवन के लिए नैतिक आचरण और जिम्मेदार नागरिकता को बढ़ावा देना। • सामाजिक और भावनात्मक कल्याण के लिए सामुदायिक सेवाओं को प्रोत्साहित करना।
  • सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर केंद्रित शिक्षा के माध्यम से व्यक्ति, परिवार और समाज में सार्थक बदलाव के लिए सामूहिक रूप से नए तरीकों का पता लगाना।
  • सस्टेनेबल और सामंजस्यपूर्ण जीवन को प्रोत्साहित के उद्देश्य से मानसिकता और जीवनशैली में बदलाव के लिए सहयोग को बढ़ावा देना।

सम्मेलन के ट्रैकः

  • मानवीय चरित्र निर्माण के लिए मानवीय शिक्षा

सह-अस्तित्व संचालित शिक्षा के लिए मानवीय पाठ्यचर्या विकास

  • मानवीय मूल्यों के लिए समग्र और न्यायसंगत शिक्षा
  • विश्व में सभी के शुभ हेतु सस्टेनेबल और पर्यावरण शिक्षा
  • शिक्षा में नैतिकता और प्रौद्योगिकीः कानून, विज्ञान और चिकित्सा
  • मानवीय चरित्र के लिए सामाजिक-मनोवैज्ञानिक परिवर्तन
  • धरती में प्राकृतिक संतुलन के लिए अर्थशास्त्र और उद्योग
  • सामाजिकता और सेवा आधारित शिक्षा के लिए नवीन शैक्षणिक दृष्टिकोण।

गतिविधियाँ और अन्य आकर्षणः

  • राष्ट्रीय सम्मेलन में नीति निर्माताओं, विधायी सदस्यों, सरकारी निकायों, गैर सरकारी संगठनों, प्रशासकों, कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, उद्योगपतियों, उद्यमियों, विचारकों, सिविल सोसायटी, मीडिया आदि सहित देश-विदेश के अनेक क्षेत्रों से २००० से अधिक प्रतिभागियों के भाग लेने की उम्मीद है।

सम्मेलन से पहले और उसके दौरान विभिन्न गतिविधियाँ हैं:

  • राष्ट्रीय स्तर की निबंध प्रतियोगिता
  • पोस्टर प्रस्तुति
  • राष्ट्रीय स्तर का कांफ्रेंस
  • प्रदर्शनी एवं नेटवर्किंग
  • गोलमेज चर्चाएँ
  • अन्य सत्र

https://bit.ly/26JV_sammelan2024

राष्ट्रीय संमेलन मे आप सबको हार्दिक आमंत्रण है। कृपया आपकी और परिवार की सूचना इस लिंक मे रजिस्टर करे ताकि हम यथा संभव व्यवस्था कर सके। 🙏🏻फॉर्म भरने मे कोई असुविधा हो तो इस नंबर पर

contact कर सकते है।१.चेतना बहन 9879372269 २.जिगर भाई 9601279910३. अंकित भाई 9979998422

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“भूमि स्वर्गताम यातु
मनुष्य यातु देवताम्:
धर्मो सफलताम यातु
नित्यं यातु शुभोदयम्I “

-A.Nagraj, Propounder- Madhyasth Darshan

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