Skip to content

जीवन विद्या

Jeevan Vidya

Menu
  • Home
  • जीवन विद्या
  • जीवन विद्या शिविर
  • जीवन विद्या गतिविधियां
  • जीवन विद्या लेख
  • जीवन विद्या वीडियो
  • सोशल
Menu
बुद्धि के साथ “विवेक” पूर्वक हम सुखी होते हैं.

बुद्धि के साथ “विवेक” पूर्वक हम सुखी होते हैं.

Posted on November 30, 2023

बुद्धि के साथ “विवेक” पूर्वक हम सुखी होते हैं.

=============================

बुद्धि के साथ सुखी होने की विधि है – विवेक। अविवेक पूर्वक हम दुखी होते हैं। विवेक के बारे हमें विगत में पूर्वजों ने बताया था – “आत्मा का अमरत्व और शरीर का नश्वरत्व विवेक है”। सह-अस्तित्व वादी विधि से हम यहाँ बता रहे हैं – जीवन का अमरत्व, शरीर का नश्वरत्व, और व्यवहार के नियम ये तीन मिला करके विवेक है। जीवन के रूप में मैं अमर हूँ – यह समझ में आना। शरीर गर्भ में जैसा रहता है, बाहर वैसा नहीं रहता, और बड़े होने पर वैसा नहीं रहता, फ़िर एक दिन शरीर विरचित भी होता है – यह हमारे सामने घटित घटनाएं हैं। शरीर प्राण-कोशों से रचित एक रचना है। रचना का विरचना होता ही है। शरीर नश्वर है – यह समझ में आना। शरीर को विरचित होना ही है, तो इसका क्या किया जाए? सदुपयोग किया जाए। शरीर का सदुपयोग करने हेतु हम “व्यवहार के नियम” पर जाते हैं। शरीर के नश्वरत्व के प्रति हम पूरा आश्वस्त रहते हैं। जीवन के अमरत्व के प्रति हम पूरा आश्वस्त रहते हैं। व्यवहार के नियमो के प्रति हम पूरा आश्वस्त रहते हैं। बुद्धि की ताकत इन तीनो को समझने से है। विवेक पूर्वक जीने से हम “सुखी” होते हैं।

अविवेक पूर्वक सोचते हैं, तो शरीर को अमर मानना शुरू कर देते हैं। जीवन को अमर मानने की जगह शरीर को अमर मानने पर दुखी होना स्वाभाविक है। “शरीर का नश्वरत्व” को स्वीकारना नियति-सहज स्वीकृति है। नियति-सहज का मतलब – शरीर का विरचित होना एक अस्तित्व-सहज क्रियाकलाप है। अस्तित्व सहज जो भी क्रियाकलाप है, उसको नियति-सहज माना। मानव अपनी कल्पनाशीलता और कर्म-स्वतंत्रता वश शरीर को अमर माना है, उससे दुखी होना निश्चित ही है। शरीर को जीवन मानते हैं, तो शरीर में होने वाला छोटा सा परिवर्तन हमको भयंकर विध्न जैसा प्रतीत होने लगता है। इसीलिये – शरीर को शरीर मानने की आवश्यकता है, जीवन को जीवन मानने की आवश्यकता है। जीवन और शरीर के संयुक्त रूप में मानव संज्ञा में होने की बात को स्वीकारने की आवश्यकता है। इन स्वीकृतियों के साथ हम विवेक पूर्वक जीते हैं। विवेक पूर्वक जीने से हम सुखी होते हैं।

विवेक को हटाया – मतलब, “जीवन के अमरत्व” को भुलावा दे दिया। फ़िर हमारे लिए शरीर ही जीवन हो गया। शरीर को जीवन मानने के बाद दुःख का रोड़ा शुरू हो गया। इतना ही बात है।

इस तरह से मनुष्य के पास ये पाँच विभूतियाँ (रूप, बल, पद, धन, और बुद्धि) सदा-सदा है। कोई आदमी नहीं है, जो इन पाँचों से रिक्त हो। अपने में इनको अनुभव करना है, कि मैं इन पाँचों से संपन्न मनुष्य हूँ। ये बात पता चला – हम सभी सुखी होने के इच्छुक हैं। फ़िर रूप के साथ सद्चरित्र, बल के साथ दया, धन के साथ उदारता, पद के साथ न्याय, और बुद्धि के साथ विवेक पूर्वक हम सुखी होते हैं। इतना ही बात है।

सारा मनुष्य जाति का सुखी या दुखी होने का इतिहास इतना ही है। चाहे विगत में हो, वर्तमान में हो, या भविष्य में हो। तीनो काल में सुखी या दुखी होने की प्रक्रिया इतना ही है। ये “निर्णायक” विधि से स्पष्ट है। “निर्णायक” मतलब – इसमें अब तर्क कुछ भी नहीं है।-

श्रद्धेय बाबा श्री नागराज जी के उदबोधन से

(अनुभव शिविर २००६, अमरकंटक)

आभार – मध्यस्थ दर्शन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

“भूमि स्वर्गताम यातु
मनुष्य यातु देवताम्:
धर्मो सफलताम यातु
नित्यं यातु शुभोदयम्I “

-A.Nagraj, Propounder- Madhyasth Darshan

current post

  • जीवन विद्या सोशल मडिया
    जीवन विद्या सोशल मडियाDecember 12, 2024
  • जीवन विद्या सम्मेलन में रजिस्ट्रेशन आवास इत्यादि की सूचना
    जीवन विद्या सम्मेलन में रजिस्ट्रेशन आवास इत्यादि की सूचनाNovember 7, 2024
  • जीवन विद्या 26 वा राष्ट्रीय सम्मेलन में व्यवस्था संबंधित सूचनाऐं
    जीवन विद्या 26 वा राष्ट्रीय सम्मेलन में व्यवस्था संबंधित सूचनाऐंNovember 4, 2024
  • आदरणीय राजन शर्मा जी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा
    आदरणीय राजन शर्मा जी की स्मृति में श्रद्धांजलि सभाNovember 3, 2024
  • २५वां जीवन विद्या वार्षिक सम्मेलन २०२४ के अंतर्गत समानांतर गोष्ठियों का आयोजन किया गया है
    २५वां जीवन विद्या वार्षिक सम्मेलन २०२४ के अंतर्गत समानांतर गोष्ठियों का आयोजन किया गया हैOctober 29, 2024
  • अभ्युदय संस्थान, अछोटी में जीवन विद्या परिचय शिविर 2024
    अभ्युदय संस्थान, अछोटी में जीवन विद्या परिचय शिविर 2024October 28, 2024
  • जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन में volunteers  के रूप में सहयोग देने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करें
    जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन में volunteers के रूप में सहयोग देने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करेंOctober 4, 2024
  • जीवन विद्या परिचय शिविर गुजरात 2024
    जीवन विद्या परिचय शिविर गुजरात 2024September 29, 2024
  • जीवन विद्या परिचय शिविर अभ्युदय संस्थान धनौरा, हापुड़
    जीवन विद्या परिचय शिविर अभ्युदय संस्थान धनौरा, हापुड़September 29, 2024
  • जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन में अपना रजिस्ट्रेशन करें
    जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन में अपना रजिस्ट्रेशन करेंSeptember 28, 2024
  • अभ्युदय संस्थान, अछोटी में जीवन विद्या परिचय शिविर
    अभ्युदय संस्थान, अछोटी में जीवन विद्या परिचय शिविरSeptember 28, 2024
  • जीवन विद्या वर्कशॉप – 2024 (लोनावाला)
    जीवन विद्या वर्कशॉप – 2024 (लोनावाला)September 23, 2024
  • प्रश्न मुक्ति शिविर
    प्रश्न मुक्ति शिविरSeptember 23, 2024
  • जीवन विद्या अध्ययन शिविर
    जीवन विद्या अध्ययन शिविरSeptember 23, 2024
  • अध्ययन – मनन गोष्ठी
    अध्ययन – मनन गोष्ठीSeptember 18, 2024
  • २६ वां वार्षिक जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन २०२४
    २६ वां वार्षिक जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन २०२४September 15, 2024
  • जीवन विद्या परिचय शिविर
    जीवन विद्या परिचय शिविरSeptember 6, 2024
  • जीवन विद्या वर्कशॉप – 2024 (लोनावाला)
    जीवन विद्या वर्कशॉप – 2024 (लोनावाला)September 3, 2024
  • अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित चिंतन मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद पर आधारित जीवन विद्या परिचय शिविर
    अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित चिंतन मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद पर आधारित जीवन विद्या परिचय शिविरSeptember 3, 2024
Social
  • Youtube
  • Twitter
  • Telegram
  • Instagram
  • Facebook
  • Pinterest

Categories

  • Video
  • Jeevan Vidya
  • Jeevan Vidya Camp
  • Jivan Vidya activity
  • Jeevan Vidya blog

About
  • This website only information
  • Official site- Jeevan vidya
  • मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववाद
  • madhyasthdarshanjeevanvidya@gmail.com
©2026 जीवन विद्या | Design:By Softdigi