*गौरवपूर्ण उपलब्धियों से परिपूर्ण 25वां जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन*

*मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद के प्रकाश में मानवीय शिक्षा का सार्वभौम स्वरूप विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन*

*17 राज्यों से 1000 से अधिक लोगों की सहभागिता*

*महाराष्ट्र अध्ययनशील परिवार और दिव्य पथ संस्थान का गौरवपूर्ण आयोजन*

*3 विश्वविद्यालयों, एक महाविद्यालय सहित 13 शैक्षणिक संस्थान सह आयोजक*

*समाधान महाविद्यालय, बेमेतरा, अभिभावक विद्यालय भी सह आयोजक*

*36 शोधार्थियों ने मध्यस्थ दर्शन से संबंधित विषयों पर प्रस्तुत किया शोध पत्र/आलेख*

*दिल्ली शिक्षा निदेशालय के 130 टीचर हुए सहभागी*
*हेडगेवार स्मृति भवन, नागपुर, महाराष्ट्र में आयोजित 3 दिवसीय जीवन विद्या राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत देश के कई राज्यों से मानवीय शिक्षा और व्यवस्था के लिए शोधरत जीवन विद्या परिवार के 1000 से अधिक प्रतिभागी सम्मिलित हुए। इस सम्मेलन का विषय था – मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद के प्रकाश में शिक्षा की सर्वभौमता का स्वरूप। यह सम्मेलन महाराष्ट्र अध्ययनशील परिवार और दिव्य पथ संस्थान, अमरकंटक के तत्वाधान में आयोजित था। जिसमें सह आयोजक के रूप में आई ए एस ई मानद विश्वविद्यालय, सरदारशहर, राजस्थान, आत्मीय विश्वविद्यालय, राजकोट, लोक जागृति विश्वविद्यालय, अहमदाबाद, गुजरात, समाधान महाविद्यालय, बेमेतरा, अभिभावक विद्यालय, रायपुर, अछोटी सहित कुल 13 संस्थाएं सह आयोजक के रूप में सहभागी हुए। समाधान महाविद्यालय के प्राध्यापक और बी एड के छात्राध्यापक सम्मिलित हुए। समाधान महाविद्यालय के प्रबंधन और प्राध्यापकों ने रिसर्च पेपर पब्लिकेशन की जिम्मेदारी ली थी जिसमे देश के अलग अलग राज्यों से 33 शोध पत्र और आलेखों को प्रस्तुत किया गया। एक माह बाद एक्सपर्ट रिव्यू के बाद इसका प्रकाशन किया जायेगा। अभ्युदय संस्थान अछोटी में निवासरत आई आई टी दिल्ली से पी एच डी डॉ मीनाक्षी राठौर ने चेतना विकास मूल्य शिक्षा प्रयोगों की उपलब्धियां एवं अग्रिम संभावनाएं, अभिभावक विद्यालय से अनीता शाह ने मध्यस्थ दर्शन में शिक्षा का व्यवहारिक स्वरूप, शिक्षिका गौरीकांता साहू ने उत्सवपारा सांकरी परिवारमुलक स्वराज्य व्यवस्था एक प्रयोग का विश्लेषणात्मक अध्ययन, डॉ. सुरेंद्र पाठक ने भारतीय परंपरागत दर्शनों की तुलना में मध्यस्थ दर्शन, अमरकंटक से सुनीता शर्मा ने चेतना विकास मूल्य शिक्षा से मानव में समानता और सामरस्यता का अध्ययन, हैप्पीनेस पाठ्यक्रम दिल्ली के चेयरमैन डॉ. अनिल तेवतिया ने जीवन विद्या शिविर का दिल्ली शिक्षा निदेशालय के शिक्षकों की भूमिका पर प्रभाव, समाधान महाविद्यालय से डॉ अवधेश पटेल ने मध्यस्थ दर्शन के प्रकाश में सतत विकास का स्वरूप विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। इसके अलावा मध्यस्थ दर्शन से संबंधित विभिन्न विषयों में छत्तीसगढ़ के 20 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाओं ने, आत्मीय विश्वविद्यालय के प्राध्यापक पारस कलारिया, दिल्ली से डॉ अशोक ठाकुर, सूरत से अजय जैन, अभ्युदय संस्थान से पूनम साहू, सोनालिका, बलवंता साहू, लक्ष्मी प्रसाद पटेल, पावित्रो यादव सहित 36 लोगों ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। यह राष्ट्रीय सम्मेलन मानवीय शिक्षा और व्यवस्था की दृष्टि से उल्लेखनीय उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा।*
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