आमंत्रण जीवन विद्या परिचय शिविर, दिनांक 13 सितम्बर से 19 सितम्बर 24, स्थान: सेवा धाम, नन्दन पहाड़ के पास माननीय बंधु, सही वर्तमान ही सुखद भविष्य का सूत्र है। हम सही को…
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अध्ययन में मन लगना
अध्ययन में मन लगना जीवन-ज्ञान के लिए आशा ही जिज्ञासा है. अध्ययन में मन लगता है तो अनुभव होता है. मन नहीं लगता है, तो पूरा ठीक से सुना भी या नहीं,…
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Youtube: https://bit.ly/S2007APrYT |Download: https://bit.ly/S2007AP Audio of conversations with Shri A.Nagrajare now ready for staggered release!
न्याय, धर्म, सत्य की निर्विरोधता ही स्नेह है।
स्नेह निमंत्रण न्याय, धर्म, सत्य की निर्विरोधता ही स्नेह है। प्रणेता – ए. नागराज विषय :- परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था को समझने और उसमें जीने के अभ्यास । मानव अनादि काल से…
सुविधा-संग्रह या समाधान-समृद्धि
सुविधा-संग्रह या समाधान-समृद्धि मध्यस्थ-दर्शन का प्रस्ताव सुनना, सुनने में सहमत होना – यह पहली बात है। समझने की कोशिश करना – यह दूसरी बात है। समझ में आने के क्रम में जीने…
प्राणावस्था से जीवावस्था और ज्ञानावस्था तक प्रगटन
प्राणावस्था से जीवावस्था और ज्ञानावस्था तक प्रगटन••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• प्राण-सूत्रों में निहित रचना-विधि में विकास होते-होते जीव-शरीर को तैयार कर दिया. दूसरी ओर, गठन-पूर्ण परमाणु के स्वरूप में चैतन्य-प्रकृति शुरू हुआ. गठन-पूर्ण परमाणु अपने…
पदार्थावस्था से प्राणावस्था तक प्रकटन
पदार्थावस्था से प्राणावस्था तक प्रकटन ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• सबसे पहले यह समझना बहुत ज़रूरी है कि संसार का क्रियाकलाप स्वयंस्फूर्त है. प्रकृति को अपना क्रियाकलाप सीखने के लिए मनुष्य की आवश्यकता नहीं है. किसी…
अध्ययन मनुष्य का मनुष्य के साथ ही होता है।
अध्ययन मनुष्य का मनुष्य के साथ ही होता है। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••किताब से सूचना है। अध्ययन मनुष्य का मनुष्य के साथ ही होता है। दो व्यक्ति के बिना प्रमाण का प्रश्न ही नहीं है।…
अनुभव का प्रभाव
अनुभव का प्रभाव ••••••••••••••••••••मनुष्य अनुभव पूर्वक संज्ञानीयता के साथ जब जीने लगता है तो जितने भी निरर्थकताएं उसके सामने आते हैं, वे निरस्त हो जाते हैं, उनका प्रभाव नहीं हो पाता। यही…
अध्ययन का लक्षण
अध्ययन का लक्षण “मानवीय आचरण का अनुकरण-अनुसरण करना, उसे अपना स्वत्व बनाने की तीव्र जिज्ञासा पूर्वक निष्ठान्वित क्रियाकलाप ही अध्ययन का लक्षण है| अध्ययन की चरितार्थता आचरण में ही है| अर्थात आचरण…
अछोटी में आगामी दो माह में तीन शिविर
नमस्ते अभ्युदय संस्थान अछोटी में आगामी दो माह में तीन शिविर कार्यक्रम एक के बाद एक होने वाले हैं. साथ ही हर एक कार्यक्रम दूसरे कार्यक्रम की पूर्व अपेक्षित शिविर के रूप…
cordially invites you to Convention on Human Values in School Education
School of Co-Existence cordially invites you to Convention on Human Values in School Education at SARVODAYA VIDYALAYA FU Block, Pitampura on 12 MARCH 2024, 9:30AM Chief Guest: – Mr Ashok Kumar,IAS, Secretary…
स्वावलंबी गौ पालन-स्वावलंबी गौ आधारित प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर (निःशुल्क)
गीर बंसी गीर गोशाला स्वावलंबी गौ पालन-स्वावलंबी गौ आधारित प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर (निःशुल्क) श्री गोपाल भाई सुतरिया रविवार, 10 मार्च 2024, समय प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक स्थान…
मानव जाति में मनः स्वस्थता की रिक्तता को भरने के लिए यह विकल्प प्रस्तुत हुआ है.
मानव जाति में मनः स्वस्थता की रिक्तता को भरने के लिए यह विकल्प प्रस्तुत हुआ है. =============================>समझने के बारे में मुख्य मुद्दा यह है – “पढ़ना समझना नहीं है।” पढने पर “सूचना”…
जीवन विद्या शिविर
जीवन विद्या शिविर दिनांक – 15 मार्च 2020 (रविवार) विषय – मानवीय शिक्षा एवं व्यवस्था में समाज की भूमिका अतिथि प्रवक्ता – माननीय श्री सोमदेव त्यागी मुख्य प्रबोधक – अभ्युदय संस्थान (मानवीय…
सुखी होने का ज्ञान
सुखी होने का ज्ञान प्रश्न : मानव को ज्ञान क्यों चाहिए.? उत्तर : सुखी होने के लिए। सुखी होने के बाद सुखी रहना बनता है। मानव को सुखी होने के लिए ज्ञान…
जानना, मानना, पहचानना, निर्वाह करना
जानना, मानना, पहचानना, निर्वाह करना “जानने” की वस्तु “नियम” हैं। नियम वे हैं – जो देश (स्थान) और काल (समय) के अनुसार बदलते नहीं हैं, और निरंतर बने रहते हैं। जैसे –…
विचार का मूल रूप
विचार का मूल रूप ➡️प्रश्न: विचार का मूल रूप क्या है? उत्तर: विचार का मूल रूप है – तुलन। तुलन ही गति रूप में है – विश्लेषण। वही विचार है। तुलन के…
संपर्क – सूचना – अध्ययन – अनुभव – प्रमाण
संपर्क – सूचना – अध्ययन – अनुभव – प्रमाण साक्षात्कार पाँच सूत्र (सह-अस्तित्व, सह-अस्तित्व में विकास-क्रम, सह-अस्तित्व में विकास, सह-अस्तित्व में जागृति-क्रम, और सह-अस्तित्व में जागृति) का होता है – जो अनुभव…
भ्रमित-मानव की परिभाषा
भ्रमित-मानव की परिभाषा भ्रमित मानव की परिभाषा है – न्याय का याचक बने रहना, और गलती करने के अधिकार का प्रयोग करते रहना। भ्रमित मनुष्य को गलती करने का अधिकार है। इसकी…
पहचान और निर्वाह
पहचान और निर्वाह हर वस्तु अनंत कोण संपन्न है। हर वस्तु हर कोण से दीखता है। हर वस्तु किसी न किसी कोण से दूसरे वस्तु से जुड़ा ही रहता है। इस तरह…
अभी तक हम जैसे जी रहे हैं उससे हमको तृप्ति हो रहा है या नहीं इसका….
अभी तक हम जैसे जी रहे हैं उससे हमको तृप्ति हो रहा है या नहीं इसका निरीक्षण। यदि तृप्ति मिल गया है, तो उसी को किया जाए. यदि तृप्ति नहीं मिला है…
ध्वनि के एक तरीके को हम भाषा…..
ध्वनि के एक तरीके को हम भाषा कह रहे है। इन्द्रियों के साथ शब्द तैयार होता है। शब्द अंततोगत्वा भाषा के नाम से आया। भाषा है भासना। शब्द के अर्थ से वस्तु(वास्तविकता/Reality)…
जाने हुए को मान लो, माने हुए को जान लो
उपदेश: “जाने हुए को मान लो, माने हुए को जान लो” ईश्वरवादी परंपरा में कहा गया, विज्ञान में भी कहा गया – “कर के समझो”. ईश्वरवादी परम्परा में कहा गया – “आचरण…
उपयोगिता
उपयोगिता•••••••••••उपयोगिता आचरण के रूप में पहचान में आती है। हर इकाई अपनी उपयोगिता को अपने आचरण द्वारा प्रकट करती है। पानी अपनी प्यास बुझाने की उपयोगिता को अपने आचरण द्वारा प्रकट करता…
प्रकाशमानता – प्रतिबिम्बन – पहचान
प्रकाशमानता – प्रतिबिम्बन – पहचान ••••••••••••••••••••••••••••••••••हर इकाई प्रकाशमान है. प्रकाशमानता का स्वरूप है – रूप, गुण, स्वभाव, धर्म. सभी इकाइयों का प्रतिबिम्बन सभी ओर रहता है. इस सिद्धांत को हृदयंगम करने की…
इतिहास में अभी तक मानव द्वारा प्रकृति के साथ पूरकता की पहचान नहीं हुई.
इतिहास में अभी तक मानव द्वारा प्रकृति के साथ पूरकता की पहचान नहीं हुई. प्रश्न: क्या मानव अपने इतिहास में प्रकृति के साथ अपनी पूरकता के अर्थ में अपने ‘आहार’, ‘आवास’ और…
व्यवस्था का सूत्र
व्यवस्था का सूत्र •••••••••••••••••व्यापक वस्तु में प्रकृति की इकाइयां डूबी, भीगी और घिरी है. व्यापक वस्तु पारगामी होने के आधार पर सभी इकाइयां इसमें भीगी है. परमाणु-अंश भी भीगा हुआ है, इसीलिये…
ध्वनि – ताप – विद्युत
ध्वनि – ताप – विद्युत ••••••••••••••••••••••••परमाणु में गति के स्वरूप को हमने समझा. गति के फल-स्वरूप ही ध्वनि भी होता है, ताप भी होता है, विद्युत भी होता है। ताप, ध्वनि, और…
धर्म
धर्म •••••“मानव के लिए सुख ही धर्म है। सुख की आशा से ओत-प्रोत मानव को एक क्षण के लिए भी इस कामना से विमुख नहीं किया जा सकता। धर्म की परिभाषा ही…
सुखी होना
सुखी होना •••••••••••सम्बन्ध एवं संपर्क में तारतम्यात्मक व्यवहार पक्ष के आनुषंगिक मानव का, विभिन्न विभूतिपरक एवं स्थितिपरक अध्ययन आवश्यक तथा वांछनीय है। अस्तु, सभी मानव आबाल-वृद्ध निम्न बारह स्थिति में गण्य हैं।…
ज्ञानगोचर को प्राथमिकता दी जाए
ज्ञानगोचर को प्राथमिकता दी जाए •••••••••••••••••••••••••••••••••••••समझने की प्यास हम सभी में एक जैसी है. समझने के लिए कुछ बातें दृष्टिगोचर और ज्ञानगोचर संयुक्त रूप में हैं. कुछ बातें केवल ज्ञानगोचर से ही…
संविधान
संविधान मनुष्य के पास पाँच विभूतियाँ है – रूप, पद, धन, बल, और बुद्धि। इसमें से मनुष्य ने चार का – रूप, पद, धन, और बल – प्रयोग करके व्यवस्था स्थापित करने…
व्यवस्था में होने की मूल प्रवृत्ति
व्यवस्था में होने की मूल प्रवृत्ति ••••••••••••••••••••••••••••••••• किसी भी चुम्बकीय पदार्थ के दो ध्रुव बनते हैं. धरती के भी दो ध्रुव हैं क्योंकि धरती में भी चुम्बकीयता को वहन करने वाले पदार्थ…
देखना और समझना
देखना और समझना •••••••••••••••••••••••समझना जीवन में होता है. देखना जीवंत शरीर द्वारा होता है. भौतिकवाद ने देखने को प्रमाण मानते हुए, यंत्र को प्रमाण मान लिया. यहाँ से भौतिकवादी भटक गए. उसको…
कल्पनाशीलता के प्रयोग से अध्ययन
कल्पनाशीलता के प्रयोग से अध्ययन •••••••••••••••••••सर्व मानव में कल्पनाशीलता है. भ्रमित अवस्था में कल्पनाशीलता आशा, विचार और इच्छा की “अस्पष्ट गति” है. भ्रमित अवस्था में भी हम जो देखते हैं, वह कल्पनाशीलता…
छः मासिक अध्ययन शिविर सत्र 2023-24 मूल्यांकन उत्सव
छः मासिक अध्ययन शिविर सत्र 2023-24मूल्यांकन उत्सव.मान्यवरअध्ययन शिविर समापन समारोह – सत्र 2023-24, @अभ्युदय संस्थान, अछोटी.सत्र: 2023-2024 के छ: मासिक अध्ययन शिविर की शुरुवात 1 जुलाई 2023 से हुई थी, जिसका समापन…
स्वतन्त्रता
स्वतन्त्रता “◘ प्रत्येक मानव स्वतंत्र, स्वतंत्रित एवं स्वतंत्रतापूर्ण होना चाहता है।स्वतंत्र-पूर्णता का प्रत्यक्ष रूप ही है ज्ञान विवेक सहित विज्ञान का प्रयोग, जिसमें ही नियमपूर्ण उत्पादन, न्यायपूर्ण व्यवहार, धर्मपूर्ण विचार एवं सत्यमय…
निश्चितता से ही स्वतंत्रता है।
निश्चितता से ही स्वतंत्रता है। भ्रमित व्यक्ति कर्म करने में स्वतंत्र है, लेकिन फल भोगने में परतंत्र है।जागृत व्यक्ति कर्म करने में भी स्वतन्त्र है, और फल भोगने में भी स्वतन्त्र है।…
स्वतन्त्रता वास्तव में क्या है?
🏳🌈स्वतन्त्रता वास्तव में क्या है?🏳🌈 “स्वतन्त्रता” शब्द से भास होता है, मानव ऐसा भी कर सकता है, वैसा भी कर सकता है। इस तरह मनमानी करने को स्वतन्त्रता मान लिया गया है।…