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Jeevan Vidya blog

जीवन विद्या परिचय शिविर 2024

Posted on August 3, 2024

आमंत्रण जीवन विद्या परिचय शिविर, दिनांक 13 सितम्बर से 19 सितम्बर 24, स्थान: सेवा धाम, नन्दन पहाड़ के पास माननीय बंधु, सही वर्तमान ही सुखद भविष्य का सूत्र है। हम सही को…

अध्ययन में मन लगना

Posted on June 10, 2024

अध्ययन में मन लगना जीवन-ज्ञान के लिए आशा ही जिज्ञासा है. अध्ययन में मन लगता है तो अनुभव होता है. मन नहीं लगता है, तो पूरा ठीक से सुना भी या नहीं,…

audio release

Posted on June 10, 2024

Youtube: https://bit.ly/S2007APrYT |Download: https://bit.ly/S2007AP Audio of conversations with Shri A.Nagrajare now ready for staggered release!

न्याय, धर्म, सत्य की निर्विरोधता ही स्नेह है।

Posted on May 15, 2024

स्नेह निमंत्रण न्याय, धर्म, सत्य की निर्विरोधता ही स्नेह है। प्रणेता – ए. नागराज विषय :- परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था को समझने और उसमें जीने के अभ्यास । मानव अनादि काल से…

सुविधा-संग्रह या समाधान-समृद्धि

Posted on April 18, 2024

सुविधा-संग्रह या समाधान-समृद्धि मध्यस्थ-दर्शन का प्रस्ताव सुनना, सुनने में सहमत होना – यह पहली बात है। समझने की कोशिश करना – यह दूसरी बात है। समझ में आने के क्रम में जीने…

प्राणावस्था से जीवावस्था और ज्ञानावस्था तक प्रगटन

Posted on April 16, 2024

प्राणावस्था से जीवावस्था और ज्ञानावस्था तक प्रगटन••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• प्राण-सूत्रों में निहित रचना-विधि में विकास होते-होते जीव-शरीर को तैयार कर दिया. दूसरी ओर, गठन-पूर्ण परमाणु के स्वरूप में चैतन्य-प्रकृति शुरू हुआ. गठन-पूर्ण परमाणु अपने…

पदार्थावस्था से प्राणावस्था तक प्रकटन

Posted on April 15, 2024

पदार्थावस्था से प्राणावस्था तक प्रकटन ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• सबसे पहले यह समझना बहुत ज़रूरी है कि संसार का क्रियाकलाप स्वयंस्फूर्त है. प्रकृति को अपना क्रियाकलाप सीखने के लिए मनुष्य की आवश्यकता नहीं है. किसी…

अध्ययन मनुष्य का मनुष्य के साथ ही होता है।

Posted on April 8, 2024

अध्ययन मनुष्य का मनुष्य के साथ ही होता है। ••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••किताब से सूचना है। अध्ययन मनुष्य का मनुष्य के साथ ही होता है। दो व्यक्ति के बिना प्रमाण का प्रश्न ही नहीं है।…

अनुभव का प्रभाव

Posted on March 28, 2024

अनुभव का प्रभाव ••••••••••••••••••••मनुष्य अनुभव पूर्वक संज्ञानीयता के साथ जब जीने लगता है तो जितने भी निरर्थकताएं उसके सामने आते हैं, वे निरस्त हो जाते हैं, उनका प्रभाव नहीं हो पाता। यही…

अध्ययन का लक्षण

Posted on March 28, 2024

अध्ययन का लक्षण “मानवीय आचरण का अनुकरण-अनुसरण करना, उसे अपना स्वत्व बनाने की तीव्र जिज्ञासा पूर्वक निष्ठान्वित क्रियाकलाप ही अध्ययन का लक्षण है| अध्ययन की चरितार्थता आचरण में ही है| अर्थात आचरण…

अछोटी में आगामी दो माह में तीन शिविर

Posted on March 14, 2024

नमस्ते अभ्युदय संस्थान अछोटी में आगामी दो माह में तीन शिविर कार्यक्रम एक के बाद एक होने वाले हैं. साथ ही हर एक कार्यक्रम दूसरे कार्यक्रम की पूर्व अपेक्षित शिविर के रूप…

cordially invites you to Convention on Human Values in School Education

Posted on March 7, 2024

School of Co-Existence cordially invites you to Convention on Human Values in School Education at SARVODAYA VIDYALAYA FU Block, Pitampura on 12 MARCH 2024, 9:30AM Chief Guest: – Mr Ashok Kumar,IAS, Secretary…

स्वावलंबी गौ पालन-स्वावलंबी गौ आधारित प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर (निःशुल्क)

Posted on March 6, 2024

गीर बंसी गीर गोशाला स्वावलंबी गौ पालन-स्वावलंबी गौ आधारित प्राकृतिक कृषि प्रशिक्षण शिविर (निःशुल्क) श्री गोपाल भाई सुतरिया रविवार, 10 मार्च 2024, समय प्रातः 10 बजे से सायं 5 बजे तक स्थान…

मानव जाति में मनः स्वस्थता की रिक्तता को भरने के लिए यह विकल्प प्रस्तुत हुआ है.

Posted on March 1, 2024

मानव जाति में मनः स्वस्थता की रिक्तता को भरने के लिए यह विकल्प प्रस्तुत हुआ है. =============================>समझने के बारे में मुख्य मुद्दा यह है – “पढ़ना समझना नहीं है।” पढने पर “सूचना”…

जीवन विद्या शिविर

Posted on February 29, 2024

जीवन विद्या शिविर दिनांक – 15 मार्च 2020 (रविवार) विषय – मानवीय शिक्षा एवं व्यवस्था में समाज की भूमिका अतिथि प्रवक्ता – माननीय श्री सोमदेव त्यागी मुख्य प्रबोधक – अभ्युदय संस्थान (मानवीय…

सुखी होने का ज्ञान

Posted on February 25, 2024

सुखी होने का ज्ञान प्रश्न : मानव को ज्ञान क्यों चाहिए.? उत्तर : सुखी होने के लिए। सुखी होने के बाद सुखी रहना बनता है। मानव को सुखी होने के लिए ज्ञान…

जानना, मानना, पहचानना, निर्वाह करना

Posted on February 24, 2024

जानना, मानना, पहचानना, निर्वाह करना “जानने” की वस्तु “नियम” हैं। नियम वे हैं – जो देश (स्थान) और काल (समय) के अनुसार बदलते नहीं हैं, और निरंतर बने रहते हैं। जैसे –…

विचार का मूल रूप

Posted on February 20, 2024

विचार का मूल रूप ➡️प्रश्न: विचार का मूल रूप क्या है? उत्तर: विचार का मूल रूप है – तुलन। तुलन ही गति रूप में है – विश्लेषण। वही विचार है। तुलन के…

संपर्क – सूचना – अध्ययन – अनुभव – प्रमाण

Posted on February 19, 2024

संपर्क – सूचना – अध्ययन – अनुभव – प्रमाण साक्षात्कार पाँच सूत्र (सह-अस्तित्व, सह-अस्तित्व में विकास-क्रम, सह-अस्तित्व में विकास, सह-अस्तित्व में जागृति-क्रम, और सह-अस्तित्व में जागृति) का होता है – जो अनुभव…

भ्रमित-मानव की परिभाषा

Posted on February 18, 2024

भ्रमित-मानव की परिभाषा भ्रमित मानव की परिभाषा है – न्याय का याचक बने रहना, और गलती करने के अधिकार का प्रयोग करते रहना। भ्रमित मनुष्य को गलती करने का अधिकार है। इसकी…

पहचान और निर्वाह

Posted on February 18, 2024

पहचान और निर्वाह हर वस्तु अनंत कोण संपन्न है। हर वस्तु हर कोण से दीखता है। हर वस्तु किसी न किसी कोण से दूसरे वस्तु से जुड़ा ही रहता है। इस तरह…

अभी तक हम जैसे जी रहे हैं उससे हमको तृप्ति हो रहा है या नहीं इसका….

Posted on February 16, 2024

अभी तक हम जैसे जी रहे हैं उससे हमको तृप्ति हो रहा है या नहीं इसका निरीक्षण। यदि तृप्ति मिल गया है, तो उसी को किया जाए. यदि तृप्ति नहीं मिला है…

ध्वनि के एक तरीके को हम भाषा…..

Posted on February 15, 2024

ध्वनि के एक तरीके को हम भाषा कह रहे है। इन्द्रियों के साथ शब्द तैयार होता है। शब्द अंततोगत्वा भाषा के नाम से आया। भाषा है भासना। शब्द के अर्थ से वस्तु(वास्तविकता/Reality)…

जाने हुए को मान लो, माने हुए को जान लो

Posted on February 12, 2024

उपदेश: “जाने हुए को मान लो, माने हुए को जान लो” ईश्वरवादी परंपरा में कहा गया, विज्ञान में भी कहा गया – “कर के समझो”. ईश्वरवादी परम्परा में कहा गया – “आचरण…

उपयोगिता

Posted on February 12, 2024

उपयोगिता•••••••••••उपयोगिता आचरण के रूप में पहचान में आती है। हर इकाई अपनी उपयोगिता को अपने आचरण द्वारा प्रकट करती है। पानी अपनी प्यास बुझाने की उपयोगिता को अपने आचरण द्वारा प्रकट करता…

प्रकाशमानता – प्रतिबिम्बन – पहचान

Posted on February 12, 2024

प्रकाशमानता – प्रतिबिम्बन – पहचान ••••••••••••••••••••••••••••••••••हर इकाई प्रकाशमान है. प्रकाशमानता का स्वरूप है – रूप, गुण, स्वभाव, धर्म. सभी इकाइयों का प्रतिबिम्बन सभी ओर रहता है. इस सिद्धांत को हृदयंगम करने की…

इतिहास में अभी तक मानव द्वारा प्रकृति के साथ पूरकता की पहचान नहीं हुई.

Posted on February 12, 2024

इतिहास में अभी तक मानव द्वारा प्रकृति के साथ पूरकता की पहचान नहीं हुई. प्रश्न: क्या मानव अपने इतिहास में प्रकृति के साथ अपनी पूरकता के अर्थ में अपने ‘आहार’, ‘आवास’ और…

व्यवस्था का सूत्र

Posted on February 12, 2024

व्यवस्था का सूत्र •••••••••••••••••व्यापक वस्तु में प्रकृति की इकाइयां डूबी, भीगी और घिरी है. व्यापक वस्तु पारगामी होने के आधार पर सभी इकाइयां इसमें भीगी है. परमाणु-अंश भी भीगा हुआ है, इसीलिये…

ध्वनि – ताप – विद्युत

Posted on February 7, 2024

ध्वनि – ताप – विद्युत ••••••••••••••••••••••••परमाणु में गति के स्वरूप को हमने समझा. गति के फल-स्वरूप ही ध्वनि भी होता है, ताप भी होता है, विद्युत भी होता है। ताप, ध्वनि, और…

धर्म

Posted on February 6, 2024

धर्म •••••“मानव के लिए सुख ही धर्म है। सुख की आशा से ओत-प्रोत मानव को एक क्षण के लिए भी इस कामना से विमुख नहीं किया जा सकता। धर्म की परिभाषा ही…

सुखी होना

Posted on February 5, 2024

सुखी होना •••••••••••सम्बन्ध एवं संपर्क में तारतम्यात्मक व्यवहार पक्ष के आनुषंगिक मानव का, विभिन्न विभूतिपरक एवं स्थितिपरक अध्ययन आवश्यक तथा वांछनीय है। अस्तु, सभी मानव आबाल-वृद्ध निम्न बारह स्थिति में गण्य हैं।…

ज्ञानगोचर को प्राथमिकता दी जाए

Posted on February 3, 2024

ज्ञानगोचर को प्राथमिकता दी जाए •••••••••••••••••••••••••••••••••••••समझने की प्यास हम सभी में एक जैसी है. समझने के लिए कुछ बातें दृष्टिगोचर और ज्ञानगोचर संयुक्त रूप में हैं. कुछ बातें केवल ज्ञानगोचर से ही…

संविधान

Posted on February 2, 2024

संविधान मनुष्य के पास पाँच विभूतियाँ है – रूप, पद, धन, बल, और बुद्धि। इसमें से मनुष्य ने चार का – रूप, पद, धन, और बल – प्रयोग करके व्यवस्था स्थापित करने…

व्यवस्था में होने की मूल प्रवृत्ति

Posted on February 1, 2024

व्यवस्था में होने की मूल प्रवृत्ति ••••••••••••••••••••••••••••••••• किसी भी चुम्बकीय पदार्थ के दो ध्रुव बनते हैं. धरती के भी दो ध्रुव हैं क्योंकि धरती में भी चुम्बकीयता को वहन करने वाले पदार्थ…

देखना और समझना

Posted on January 31, 2024

देखना और समझना •••••••••••••••••••••••समझना जीवन में होता है. देखना जीवंत शरीर द्वारा होता है. भौतिकवाद ने देखने को प्रमाण मानते हुए, यंत्र को प्रमाण मान लिया. यहाँ से भौतिकवादी भटक गए. उसको…

कल्पनाशीलता के प्रयोग से अध्ययन

Posted on January 31, 2024

कल्पनाशीलता के प्रयोग से अध्ययन •••••••••••••••••••सर्व मानव में कल्पनाशीलता है. भ्रमित अवस्था में कल्पनाशीलता आशा, विचार और इच्छा की “अस्पष्ट गति” है. भ्रमित अवस्था में भी हम जो देखते हैं, वह कल्पनाशीलता…

छः मासिक अध्ययन शिविर सत्र 2023-24 मूल्यांकन उत्सव

Posted on January 29, 2024

छः मासिक अध्ययन शिविर सत्र 2023-24मूल्यांकन उत्सव.मान्यवरअध्ययन शिविर समापन समारोह – सत्र 2023-24, @अभ्युदय संस्थान, अछोटी.सत्र: 2023-2024 के छ: मासिक अध्ययन शिविर की शुरुवात 1 जुलाई 2023 से हुई थी, जिसका समापन…

स्वतन्त्रता

Posted on January 29, 2024

स्वतन्त्रता “◘ प्रत्येक मानव स्वतंत्र, स्वतंत्रित एवं स्वतंत्रतापूर्ण होना चाहता है।स्वतंत्र-पूर्णता का प्रत्यक्ष रूप ही है ज्ञान विवेक सहित विज्ञान का प्रयोग, जिसमें ही नियमपूर्ण उत्पादन, न्यायपूर्ण व्यवहार, धर्मपूर्ण विचार एवं सत्यमय…

निश्चितता से ही स्वतंत्रता है।

Posted on January 28, 2024

निश्चितता से ही स्वतंत्रता है। भ्रमित व्यक्ति कर्म करने में स्वतंत्र है, लेकिन फल भोगने में परतंत्र है।जागृत व्यक्ति कर्म करने में भी स्वतन्त्र है, और फल भोगने में भी स्वतन्त्र है।…

स्वतन्त्रता वास्तव में क्या है?

Posted on January 27, 2024

🏳‍🌈स्वतन्त्रता वास्तव में क्या है?🏳‍🌈 “स्वतन्त्रता” शब्द से भास होता है, मानव ऐसा भी कर सकता है, वैसा भी कर सकता है। इस तरह मनमानी करने को स्वतन्त्रता मान लिया गया है।…

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“भूमि स्वर्गताम यातु
मनुष्य यातु देवताम्:
धर्मो सफलताम यातु
नित्यं यातु शुभोदयम्I “

-A.Nagraj, Propounder- Madhyasth Darshan

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