निमंत्रण सपरिवार आमंत्रण
आदमी चाँद पर पहुँच गया लेकिन अपनों से दूर हो गया…..
उम्र बढ़ने के साथ माता-पिता की बच्चों से बातचीत कम होती जा रही है।
भाई / बहनों की आपस में बातचीत भी कम होती जा रही है।
उम्र बढ़ने के साथ पति-पत्नि का आपस में संवाद भी औपचारिक होता जा रहा है।
पिछली पीढ़ी तक चाचा / मामा के घर रहकर कुछ साल पढ़ना या व्यवसाय करना आम बात थी लेकिन अब एक ही शहर में होकर भी साथ रहना बहुत दूर की बात।
पैसा आने के बाद पार्टनरशिप टूट जाती है और परिवार भी।
*रिश्तों में समस्या सामान (पैसा….) की कमी से है या संबंध की कमी से ??*
◆ पिछले 20 सालों में दुनिया के हर घर में सुविधाएं बढ़ी लेकिन सुख नहीं बढ़ा।
हर घर में सामान भी बढ़ा लेकिन सम्मान नहीं बढ़ा।
*अमीरी के साथ-साथ कैसे बढ़े सुख-समृद्धि ?*
◆ बेटे / बिटिया की शिक्षा पर 25 साल में न्यूनतम 25 लाख ₹ खर्च करने के बाद कोरी डिग्री मिलती है, न कि नौकरी / व्यवसाय हेतु skill एवं न ही संबंधपूर्वक जीने की योग्यता।
आधुनिक शिक्षा ने मनुष्य को सरल व समझदार की बजाय चालाक व अहंकारी बनाया।
पिछले 25 सालों में समाज में पढ़ाई बढ़ी एवं तलाक भी बढ़े।
विवाह यानि विवेक पूर्वक वहन करना।
सफल विवाह के लिए विवेक को समझना सबकी जरूरत लेकिन दुर्भाग्य से देश के सभी शैक्षणिक – सामाजिक – धार्मिक – राजनीतिक संस्थान विवेक पर मौन।
*विवेक बिना, परिवार में हम एक छत के नीचे रहते हैं लेकिन जीते नहीं बल्कि झेलते हैं !!*
◆ बुढापे में तेजी से बढ़ रहा है अकेलापन तथा कष्टदायक बीमारी युक्त मौत का अभिशाप।
90% बीमारियां साइकोसोमेटिक यानि मन को तनावमुक्त किए बिना सिर्फ दवा से इलाज असंभव !
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Workshop for Togetherness in Relations
(क्लेशमुक्त, अभावमुक्त एवं रोगमुक्त परिवार बनाने हेतु)
● Speaker : Sh Bhanu Pratap Singh, Mtech.(Human Value Expert based on Madhyasth Darshan-Jeevan Vidhya)
● दिनांक : 29 मई से 4 जून (कुल 7 दिन)
● कार्यशाला : निःशुल्क *(हवा-पानी-मिट्टी-आकाश-प्रकाश की तरह ज्ञान भी अमोल)*
● आवास-आहार सहयोग राशि : स्वेच्छिक
● संपर्क : 9413729510, 9680920202