आप क्या चाहते हैं?क्या ये आप वाकई जानते हैं,या अब तक सिर्फ मानते हैं,आइए मिलकर अपनी…असली चाहत को पहचानते हैं एक ऐसे कैंप में, जिसमें होगा…जिंदगी से जुड़े हर जवाब से आपका…
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जीवन विद्या
One- Day Orientation अभ्युदय संस्थान, अछोटी
सादर आमंत्रणOne- Day Orientationअभ्युदय संस्थान, अछोटी में_ क्यों जीना !! ; कैसे जीना !! __ विषय परएक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन ।।स्थान : मानवीय शिक्षा शोध संस्थान, (अभ्युदय संस्थान) अछोटी, जिला दुर्गदिनांक:…
समझदारी का प्रमाण
समझदारी का प्रमाण किसी आयु के बाद हर व्यक्ति अपने आप को समझदार माना ही रहता है। हर मनुष्य अपने ढंग से अपने को समझदार मानता है। जैसे कोई कहता है –…
देखने से, धर्म की…..
देखने से, धर्म की सउर देखने से पता लगता है अपराधियों के लिए ही ये सब बना हुआ है..धर्म तंत्र और राजतंत्र|क्योंकि अपराधियों को तारने वाला भी एक गुण तो मानव परंपरा…
इन्द्रिय सन्निकर्ष में ही ‘अनुभव होता है…….
“इन्द्रिय सन्निकर्ष में ही ‘अनुभव होता है’ ऐसा मानना और मनवाना, इसको लोकव्यापीकरण करने का सभी उपाय तैयार करना, साथ ही लाभोन्माद, कामोन्माद और भोगोन्मादी मानसिकता को कार्यशील, प्रगतिशील, विकासशील और अत्याधुनिक…
कल्पनाशीलता के आधार पर जिज्ञासा है।
कल्पनाशीलता के आधार पर जिज्ञासा है। जिज्ञासा ही पात्रता है। जिज्ञासा की प्राथमिकता के आधार पर ही ग्रहण होता है। जिज्ञासा की प्राथमिकता है या नहीं – इसको सटीक पहचानना अध्यापक का…
युवा शिविर
परिवार व्यवस्था में जीने के लिए अध्ययन एवं अभ्यासहेतुयुवा शिविर(श्री ए नागराज जी द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन सह- अस्तित्ववाद पर आधारित)25 दिसंबर – 1 जनवरी 2024मानव तीर्थ,छत्तीसगढ़ स्वयं में विश्वास, संबंधो में…
जीवन विद्या सार
जीवन विद्या सार सह-अस्तित्व सहज नियमों का जो मूल नियम है वो है, संपूर्ण द्रश्य-अद्रश्य/रुप-अरुप/भौतिक-अभौतिक/स्थूल-सूक्ष्म अस्तित्वसह-अस्तित्व के रुप में है, इसलिए हरपल-हरक्षण सह-अस्तित्व के द्रष्टिकोण के साथ जीना ही सह-अस्तित्व सहज मूल…
नियति विधि से नियम है
नियति विधि से नियम है नीति “नियति” से सम्बंधित है। नियति का अर्थ है – सह-अस्तित्व। सह-अस्तित्व नित्य प्रगटन-शील है। यही नियति है। साम्य-सत्ता में सम्पूर्ण जड़-चैतन्य प्रकृति क्रियाशील है। भौतिक-क्रिया, रासायनिक-क्रिया,…
आँखों से जो कुछ भी दिखता है वह किसी…..
“आँखों से जो कुछ भी दिखता है वह किसी वस्तु के रूप (आकार, आयतन, घन) में से आंशिक भाग दिखाई पड़ता है। रूप का भी सम्पूर्ण भाग आँखों में आता नहीं। जबकि…
सार्वभौम व्यवस्था
सार्वभौम व्यवस्था – सम्मलेन २००९, हैदराबाद==============>जय हो! मंगल हो! कल्याण हो! इस शुभ-कामना से हम यहाँ मिले हैं। आज मेरे वक्तव्य का मुद्दा है – “सार्वभौम व्यवस्था”। सार्वभौम व्यवस्था कैसे होती है?…
प्रश्न – मुक्ति
प्रश्न मुक्ति •••••••••••••७०० करोड़ मानवों के सभी प्रश्नों के लिए एक ही चाबी है। समझना है और प्रमाणित करना है – तो सभी प्रश्न ही समाप्त हैं। समझना नहीं है, प्रमाणित नहीं…
स्त्रोत की ओर ध्यानाकर्षण
स्त्रोत की ओर ध्यानाकर्षण जीवन विद्या योजना इस अनुसंधान की “सूचना” को जनसामान्य तक पहुंचाने का एक कार्यक्रम है. उससे लोगों में उत्साह होता है. उत्साहित लोगों को अध्ययन में लगाना चाहिए….
ऊर्जा
ऊर्जा•••••सभी संसार – एक परमाणु-अंश से लेकर परमाणु तक, परमाणु से लेकर अणु रचित रचना तक, अणु रचित रचना से लेकर प्राण-कोषा से रचित रचना तक – का क्रियाकलाप स्वयं-स्फूर्त होता हुआ…
तर्क का प्रयोजन
तर्क का प्रयोजन प्रश्न: तर्क क्या है? तर्क का प्रयोजन क्या है? उत्तर: तर्क का मतलब है क्यों और कैसे का उत्तर दे पाना । ऐसा तर्क एक प्रेरणा है । तर्क…
बुद्धि के साथ “विवेक” पूर्वक हम सुखी होते हैं.
बुद्धि के साथ “विवेक” पूर्वक हम सुखी होते हैं. ============================= बुद्धि के साथ सुखी होने की विधि है – विवेक। अविवेक पूर्वक हम दुखी होते हैं। विवेक के बारे हमें विगत में…
तन की प्यास पानी से बुझती है और मन(जीवन) की
तन की प्यास पानी से बुझती है और मन(जीवन) की प्यास अस्तित्वसहज वस्तुओं(वास्तविकताओं) में तदाकार होने पर ही बुझती है।तदाकार होने की स्थिति केवल अध्ययन से आता है। तदाकार से आशय है…
मानसिकता
मानसिकता••••••••••••••➡️ मानव परंपरा में यह विदित है कि मानव क्रियाकलाप के मूल में मानसिकता का रहना अत्यावश्यक है । मानसिकता विहीन मानव को मृतक या बेहोश घोषित किया जाता है । विकृत…
मानव जाति, मानव धर्म
मानव जाति, मानव धर्म मानव धर्म के बारे में, तीन आशय समाहित हैं| विकसित चेतना में जीता हुआ मानव, देव मानव, दिव्य मानव का अध्ययन है | चेतना के सन्दर्भ में चार…
न्याय दृष्टि जीवन में रहता ही है, पर जागृत नहीं हुआ रहता है
न्याय दृष्टि जीवन में रहता ही है, पर जागृत नहीं हुआ रहता है•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• न्याय चाहिए, पर प्रिय-हित-लाभ के चंगुल से छुटे नहीं हैं. अभी हम न्याय को भी संवेदनाओं के साथ जोड़ते…
मध्यस्थ-क्रिया का स्वरुप
मध्यस्थ-क्रिया का स्वरुप मध्यस्थ-क्रिया वह है – जो सम और विषम से अप्रभावित रहता है, और सम और विषम क्रियाओं को संतुलित बना कर रखता है। इसके दो स्वरुप हैं। (१) परमाणु…
होना और रहना
होना और रहना “होना” अस्तित्व में प्रकटन विधि से है। अस्तित्व प्रयोजनशील है – इसलिए इसमें उत्ततोत्तर विकास-क्रम और जागृति-क्रम का क्रमिक-प्रकटन भावी है। इसी क्रम में – पदार्थावस्था समृद्ध होने पर…
जागृत मानव के अनुभव की वस्तु
जागृत मानव के अनुभव की वस्तु “जागृत मानव (दृष्टा पद) = “Awakened Human Being (The Seer) has: – Information Source–
परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था
परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था दस व्यक्तियों के समझदार परिवार में समाधान-समृद्धि का वैभव होता है। ऐसे दस समझदार परिवार एक-एक व्यक्ति को अपने में से निर्वाचित करते हैं, जो परिवार-समूह सभा को…
मध्यस्थ दर्शन सूत्र
नमस्ते जी जब संबंध नहीं है तो पैसा एकमात्र शरण है। जो चीज जिस काम के लिए बनी है उस चीज को उस काम के लिए उपयोग करना ही उसकी उपयोगिता है।…
सुखी एवं समृद्ध परिवार कार्यशाला*
सुखी एवं समृद्ध परिवार कार्यशाला* कहीं देर न हो जाए……. ……पारिवारिक रिश्ते “कोमा” में !! जिंदगी के शुरुआती 20 व अंतिम 10 साल परिवार में गुजारना मजबूरी। “बुढ़ापे में अपनों के बीच…
युवा शिविर
परिवार व्यवस्था में जीने के लिए अध्ययन एवं अभ्यासहेतुयुवा शिविर(श्री ए नागराज जी द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन सह- अस्तित्ववाद पर आधारित)25 दिसंबर – 1 जनवरी 2023मानव तीर्थ,छत्तीसगढ़ स्वयं में विश्वास, संबंधो में…
परस्पर पहचान होना प्रकाशन का मतलब है.
परस्पर पहचान होना प्रकाशन का मतलब है. हर वस्तु के सभी ओर उसका प्रतिबिम्ब रहता है। क्योंकि हर वस्तु सीमित होता है। सीमित होने के आधार पर ही “एक” के रूप में…
मानवीय संविधान: परिचर्चा
मानवीय संविधान: परिचर्चा हर रविवार प्रातः 05:00 बजे से 06:00 बजे तक (दिनांक 19 नवम्बर से प्रारम्भ होकर 12 सप्ताह तक) सान्निध्य : श्री साधन भैया सादर अभिवादन🙏बताते हुए हमें बहुत प्रसन्नता…
आहार-विहार-व्यवहार
आहार-विहार-व्यवहार आहार-विहार-व्यवहार द्वारा मानव अपनी स्वस्थ-मानसिकता का प्रदर्शन करता है|आहार से आशय है – खान-पान, जैसे – शाकाहार-दुग्धपान या माँसाहार-मद्यपान.विहार से आशय है – रहन-सहन, जैसे – ओढ़ना-पहनना, मनोरंजन, व्यायाम, खेल-कूद, घूमना…
जीवन विद्या परिचय कार्यशाला 2023
“मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववाद” के प्रणेताश्रद्धेय ए. नागराजजी द्वारा प्रतिपादित,जीवन विद्या परिचय कार्यशाला गहन अनुसंधान के आधार पर जीवन के उद्देश्य और इसे पाने के पथ की स्पष्ट समझ। सदा सुखी रहने के…
प्रचार-माध्यमों की सार्थकता
प्रचार-माध्यमों की सार्थकता आज सभी प्रचार-माध्यम अपराध-गतिविधियों को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित किया करता है। प्रचार-माध्यम का मूल स्वरूप सही-गलती को चेताने से है, अथवा स्पष्ट करने से है। इसमें से “गलती”…
जीवन विद्या
जीवन विद्या मध्यस्थ दर्शन ( सहअस्तित्ववाद) मैं जीवन एवं शरीर के संयुक्त रूप में मानव हुँ। (भ्रम मुक्ति) जीवन में मैं आत्मा (मध्यांश) हूँ मन, वृत्ति, चित्त, बुद्धि मेरा है। (गठनपूर्णता) मुझे…
जीवन विद्या परिचय शिविर, बांदा उत्तर प्रदेश 2023
मानव में : परिवार समाज व्यवस्था, मूल चरित्र नीति, व्यवसाय समाज प्रकृति, कार्य व्यवहार विचार अनुभव, जड़ चैतन्य व्यापक, भौतिक रासायनिक व चैतन्य क्रिया, न्याय धर्म सत्य का अर्थ एवं महत्व जानने…
जड़ और चैतन्य
जड़ और चैतन्य~~जड़-प्रकृति और चैतन्य-प्रकृति दोनों गतिशील/क्रियाशील हैं – लेकिन दोनों की मौलिकताएं अलग-अलग हैं। चैतन्य-प्रकृति में परावर्तन और प्रत्यावर्तन दोनों हैं, जबकि जड़ प्रकृति में केवल परावर्तन है। परावर्तन का मतलब…
पारिवारिक खुशहाली शिविर
घोषणा छुट्टियां खुशी के पल होते हैंपर क्या हमें यह पता है कि खुशी क्या होती है?आइए इस ठंडी की छुट्टियां इसके ही अन्वेषण (Exploration) में लगायेंपारिवारिक खुशहाली शिविर(Family Happiness Workshop)स्रोत: मध्यस्थ…
ज्ञान
ज्ञान मानव में ऊर्जा-सम्पन्नता ज्ञान के रूप में है। भ्रमित रहते तक ऊर्जा का प्रयोग मनुष्य चार विषयों और पांच संवेदनाओं के रूप में करता है। जागृत होने पर ऊर्जा का प्रयोग…
Jeevan Vidya A Workshop on Coexistence
Jeevan Vidya: A dialogue based exploration of Coexistence:10 Day Introductory Workshop in English.Location: Dharwad, Karnataka (Near Hubli)Dates: 24th December 2023 – 02 January 2024Faciliator: Shriram Narasimhan.REGISTER: https://bit.ly/jvengTOPICS• Mind & Reality More Info…
अभ्युदय संस्थान, अछोटी में जीवन विद्या परिचय शिविर
मान्यवर,🙏अभ्युदय संस्थान, अछोटी में जीवन विद्या परिचय शिविर के लिए.. आरक्षित करें अपना समय🙏.सूचना- अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित चिंतन मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद पर आधारित जीवन विद्या परिचय शिविरप्रबोधक: सुरेन्द्र पाल भैयादिनांक:…
मूल्यों की समझ
मूल्यों की समझ “अस्तित्व में परस्परता में सम्बन्ध हैं ही| अस्तित्व में हर वस्तु प्रयोजन सहित ही है| सम्बन्ध को उनके प्रयोजन को पहचान कर निर्वाह करते हैं तो उनमे निहित मूल्यों…