नमस्ते जी
जब संबंध नहीं है तो पैसा एकमात्र शरण है।
जो चीज जिस काम के लिए बनी है उस चीज को उस काम के लिए उपयोग करना ही उसकी उपयोगिता है।
सर्व शुभ में मेरा शुभ समाया हुआ है।
समझने के लिए ध्यान देना है, समझने के बाद ध्यान बना ही
रहता है।
संबंध को बनाना नहीं है संबंध को पहचानना है।
संबंध है तो शोषण नहीं, शोषण है तो संबंध नहीं।
व्यवस्था को बनाना नहीं है व्यवस्था को पहचानना है।
सीमित आवश्यकताओं के लिए सीमित प्रयास निरंतर आवश्यकताओं के लिए निरंतर प्रयास।
समाधान का न होना ही समस्या है।
सुख का ना होना ही दुख है।
सामाजिकता मानव की तृप्ति की अभिव्यक्ति है।
सार्थक हमेशा साथ रहता है निरर्थक अपने आप छूट जाता है।
स्वयं के निष्कर्षों को स्वीकार कर लेना ही अध्ययन है।
स्वयं को वातावरण के दबाव से मुक्त कर लेना ही स्वतंत्रता है।
स्वयं में सम्मानित हो जाए तो दूसरों को सम्मानित कर पाते हैं।
स्वयं में विश्वास है तो दूसरों पर विश्वास कर पाते हैं।
स्वयं आगे बढ़ना,वह आगे बढ़ना नहीं है।दूसरों को आगे बढ़ाना ही आगे बढ़ना है।
मानव जाति का समस्त प्रयास केवल और केवल सुखी होने के अर्थ में है।
मानव में मूलतः समानता की चाहत है।
मानव अपने महत्व को जानकर तृप्त होता है।
मेरी उपयोगिता ही मेरा सम्मान है।
मानव की कमाई मानव से कम नहीं हो सकती।
मानव सही में एक है,गलती में अनेक हैं।
मानव का अध्ययन ही शिक्षा का मानवीकरण है।
मरते समय पछताना नहीं पड़े तो मेरा जीवन सफल है।
ना किसी से आगे चलना है ना किसी के पीछे चलना है पूर्णता के अर्थ मे सहयोग देना है और सहयोग लेना है।
पैसा जिंदा रहने का जुगाड़ है ज्ञान जीने की जरूरत है।
पैसा जिंदगी की जरूरत है जिंदगी का मकसद नहीं।
पर गुण गणना से विकास होता है,पर अवगुण गणना से विनाश होता है।
मध्यस्थ दर्शन प्रणेता बाबा ए नागराज