उपयोगिता•••••••••••उपयोगिता आचरण के रूप में पहचान में आती है। हर इकाई अपनी उपयोगिता को अपने आचरण द्वारा प्रकट करती है। पानी अपनी प्यास बुझाने की उपयोगिता को अपने आचरण द्वारा प्रकट करता…
प्रकाशमानता – प्रतिबिम्बन – पहचान
प्रकाशमानता – प्रतिबिम्बन – पहचान ••••••••••••••••••••••••••••••••••हर इकाई प्रकाशमान है. प्रकाशमानता का स्वरूप है – रूप, गुण, स्वभाव, धर्म. सभी इकाइयों का प्रतिबिम्बन सभी ओर रहता है. इस सिद्धांत को हृदयंगम करने की…
इतिहास में अभी तक मानव द्वारा प्रकृति के साथ पूरकता की पहचान नहीं हुई.
इतिहास में अभी तक मानव द्वारा प्रकृति के साथ पूरकता की पहचान नहीं हुई. प्रश्न: क्या मानव अपने इतिहास में प्रकृति के साथ अपनी पूरकता के अर्थ में अपने ‘आहार’, ‘आवास’ और…
व्यवस्था का सूत्र
व्यवस्था का सूत्र •••••••••••••••••व्यापक वस्तु में प्रकृति की इकाइयां डूबी, भीगी और घिरी है. व्यापक वस्तु पारगामी होने के आधार पर सभी इकाइयां इसमें भीगी है. परमाणु-अंश भी भीगा हुआ है, इसीलिये…
ध्वनि – ताप – विद्युत
ध्वनि – ताप – विद्युत ••••••••••••••••••••••••परमाणु में गति के स्वरूप को हमने समझा. गति के फल-स्वरूप ही ध्वनि भी होता है, ताप भी होता है, विद्युत भी होता है। ताप, ध्वनि, और…
धर्म
धर्म •••••“मानव के लिए सुख ही धर्म है। सुख की आशा से ओत-प्रोत मानव को एक क्षण के लिए भी इस कामना से विमुख नहीं किया जा सकता। धर्म की परिभाषा ही…
सुखी होना
सुखी होना •••••••••••सम्बन्ध एवं संपर्क में तारतम्यात्मक व्यवहार पक्ष के आनुषंगिक मानव का, विभिन्न विभूतिपरक एवं स्थितिपरक अध्ययन आवश्यक तथा वांछनीय है। अस्तु, सभी मानव आबाल-वृद्ध निम्न बारह स्थिति में गण्य हैं।…
ज्ञानगोचर को प्राथमिकता दी जाए
ज्ञानगोचर को प्राथमिकता दी जाए •••••••••••••••••••••••••••••••••••••समझने की प्यास हम सभी में एक जैसी है. समझने के लिए कुछ बातें दृष्टिगोचर और ज्ञानगोचर संयुक्त रूप में हैं. कुछ बातें केवल ज्ञानगोचर से ही…
जीवन विद्या परिचय शिविर
जीवन विद्या परिचय शिविर उत्तरकाशी (उत्तराखण्ड) 17 से 23 मार्च 2024 (7 दिवसीय आवासीय शिविर) प्रबोधक श्री सोम त्यागी जी श्री श्रवण कुमार शुक्ल अध्येता मध्यस्थ दर्शन यह शिविर क्यों? इन सभी…
मूल तत्व – अवलोकन शिविर
मान्यवर, सूचना: अभ्युदय संस्थान, अछोटी में –*मूल तत्व – अवलोकन शिविर * अप्रैल – माह 2024 (दिनांक: 14 अप्रैल से 28 अप्रैल 2024 तक)) * स्थान: अभ्युदय संस्थान, अछोटी, दुर्ग छत्तीसगढ़*.Please, Click…
जीवन विद्या ज्ञान उत्सव
आत्मीय बंधुओं 🙏🏻🌸आप सभी का स्वागत है *9 वें जीवन विद्या ज्ञान उत्सव में । 🌸🙏🏻जैसा कि बाबाजी ने कहा है समझने के लिए अभ्यास है और समझ को प्रमाणित करने के…
संविधान
संविधान मनुष्य के पास पाँच विभूतियाँ है – रूप, पद, धन, बल, और बुद्धि। इसमें से मनुष्य ने चार का – रूप, पद, धन, और बल – प्रयोग करके व्यवस्था स्थापित करने…
व्यवस्था में होने की मूल प्रवृत्ति
व्यवस्था में होने की मूल प्रवृत्ति ••••••••••••••••••••••••••••••••• किसी भी चुम्बकीय पदार्थ के दो ध्रुव बनते हैं. धरती के भी दो ध्रुव हैं क्योंकि धरती में भी चुम्बकीयता को वहन करने वाले पदार्थ…
जीवन विद्या परिचय शिविर अभ्युदय संस्थान धनौरा हापुड़
जीवन विद्या परिचय शिविर अभ्युदय संस्थान धनौरा हापुड़ 7 दिवसीय आवासीय शिविर मध्यस्थ दर्शन पर आधारित ए० नागराज जी द्वारा प्रतिपादित यह शिविर क्यों? हमारी जिम्मेदारी क्या होगी? इस सब पर एक…
Jeevan Vidya Introductory Course
Jeevan Vidya Introductory Course – 1st to 8th JuneFacilitator: Ashok GopalaVenue: Sambhaavnaa Institute, Palampur, Himachal PradeshDetails & Registration: https://bit.ly/JV0624En
जीवन विद्या परिचय शिविर 2024
जीवन विद्या परिचय शिविर – 22 से 29 मई 2024 प्रबोधक – अशोक गोपालास्थान – संभावना ईन्स्टिट्यूट, पालमपुर, हिमाचल प्रदेशसूचना एवं पंजियन: https://bit.ly/JV0524Hi भाषा – हिंदी में 22-29 मई, 2024 क्या आप…
देखना और समझना
देखना और समझना •••••••••••••••••••••••समझना जीवन में होता है. देखना जीवंत शरीर द्वारा होता है. भौतिकवाद ने देखने को प्रमाण मानते हुए, यंत्र को प्रमाण मान लिया. यहाँ से भौतिकवादी भटक गए. उसको…
कल्पनाशीलता के प्रयोग से अध्ययन
कल्पनाशीलता के प्रयोग से अध्ययन •••••••••••••••••••सर्व मानव में कल्पनाशीलता है. भ्रमित अवस्था में कल्पनाशीलता आशा, विचार और इच्छा की “अस्पष्ट गति” है. भ्रमित अवस्था में भी हम जो देखते हैं, वह कल्पनाशीलता…
छः मासिक अध्ययन शिविर सत्र 2023-24 मूल्यांकन उत्सव
छः मासिक अध्ययन शिविर सत्र 2023-24मूल्यांकन उत्सव.मान्यवरअध्ययन शिविर समापन समारोह – सत्र 2023-24, @अभ्युदय संस्थान, अछोटी.सत्र: 2023-2024 के छ: मासिक अध्ययन शिविर की शुरुवात 1 जुलाई 2023 से हुई थी, जिसका समापन…
स्वतन्त्रता
स्वतन्त्रता “◘ प्रत्येक मानव स्वतंत्र, स्वतंत्रित एवं स्वतंत्रतापूर्ण होना चाहता है।स्वतंत्र-पूर्णता का प्रत्यक्ष रूप ही है ज्ञान विवेक सहित विज्ञान का प्रयोग, जिसमें ही नियमपूर्ण उत्पादन, न्यायपूर्ण व्यवहार, धर्मपूर्ण विचार एवं सत्यमय…
निश्चितता से ही स्वतंत्रता है।
निश्चितता से ही स्वतंत्रता है। भ्रमित व्यक्ति कर्म करने में स्वतंत्र है, लेकिन फल भोगने में परतंत्र है।जागृत व्यक्ति कर्म करने में भी स्वतन्त्र है, और फल भोगने में भी स्वतन्त्र है।…
स्वतन्त्रता वास्तव में क्या है?
🏳🌈स्वतन्त्रता वास्तव में क्या है?🏳🌈 “स्वतन्त्रता” शब्द से भास होता है, मानव ऐसा भी कर सकता है, वैसा भी कर सकता है। इस तरह मनमानी करने को स्वतन्त्रता मान लिया गया है।…
स्वत्व, स्वतंत्रता, स्वराज्य
स्वत्व, स्वतंत्रता, स्वराज्य “स्वत्व”, “स्वतंत्रता”, और “स्वराज्य” – ये तीन शब्द हम हमारे देश में बड़े समय से सुनते आए हैं। पर ये वास्तविकता में हैं क्या – यह समझ में किसी…
स्वतन्त्रता “अनुभव दर्शन से
💢 स्वतन्त्रता “अनुभव दर्शन से” ◘ क्लेश ही दास्यता है। यह अजागृति का प्रतीक है। उससे मुक्ति ही स्वतंत्रता का लक्षण है।◘ स्वकर्म-परिपाक संस्कार अध्ययन एवं वातावरण ही स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के…
अभ्युदय संस्थान, अछोटी में –अध्ययन बिंदु शिविर
मान्यवर,सूचना: अभ्युदय संस्थान, अछोटी में –अध्ययन बिंदु शिविर – जीवन विद्या (9 दिवसीय – आवासीय शिविर) प्रबोधक: श्री सुरेंद्र पाल भैया दिनांक: 10 फरवरी 2024 से 18 फरवरी 2024 तक आपको यह…
जीवनविद्या परिचय शिविर – 2024 (उतर काशी-1)
जीवनविद्या परिचय शिबिर – 2024 (उतर काशी-1) दिनांक: 17 मार्च से 23 मार्च – 2024 प्रबोधक: सोमभाई त्यागी स्थान: तपोवन आश्रम , चिन्मया मिशन, उत्तर काशी , उत्तराखंड लोकेशन : https://goo.gl/maps/88PfsvbJVxcbB5fbA नोट…
अभिभावक शिविर
अभिभावक शिविर (शिक्षा के साथ संस्कार) 29 जनवरी से 02 फरवरी तक प्रतिदिन दोपहर 3 से 5 बजे तक स्थान – AV Kids (अभिभावक विद्यालय) सेक्टर 03, डीडीनगर रायपुर (सांई च्वाइस सेंटर…
एक दिवसीय पैरेंटिंग वर्कशाप
रायपुर, 24 जनवरी। चेतना विकास मूल्य शिक्षा समिति एवं अभ्युदय संस्थान अछोटी व्दारा एक दिवसीय पैरेंटिंग वर्कशाप का आयोजन 27 जनवरी को दोपहर 3 से 5 बजे तक किया गया है। डीडी नगर…
भाई-बहन संबंध
भाई-बहन संबंधः भाई-बहन संबंध को सौहार्द्र भाव के नाम से जाना जाता है। इस में परस्पर जागृति की प्रत्याशा एवं उत्साह है। एक की जागृति दूसरे पक्ष के जागृति को आप्लावित कर…
सुख
सुख••••• “मानव सुखी होना चाहता है। सुख के स्वरूप ज्ञान के लिए मैंने प्रयत्न किया। मानव का अध्ययन न हो और सुख पहचान में आ जाए – ऐसा हो नहीं सकता। दूसरे,…
तृप्ति के लिए उपाय
तृप्ति के लिए उपाय •••••••••••••••••••••सह-अस्तित्व के प्रस्ताव से सहमति होने से रोमांचकता तो होती है – पर उतने भर से तृप्ति नहीं है। तृप्ति के लिए क्या किया जाए? तृप्ति के लिए…
जीवन विद्या प्रवचन
॥ हरिहर ॥ भूमि : स्वर्गताम् यातु मनुष्यो यातु देवताम् धर्मो सफलताम् यातु नित्यम् यातु शुभोदयम् ॥ प्रणेता परम् श्रद्धेय श्री ए० नागराज जी द्वारा प्रतिपादित आस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित चिंतन मध्यस्थ…
न्याय, धर्म, सत्य
न्याय, धर्म, सत्य •••••••••••••••••(समझ पूर्ण होने से पहले) न्याय, धर्म, सत्य के अनुसार तुलन करने के लिए वृत्ति में वस्तु नहीं है, शब्द है। शब्द है – तभी मनुष्य यह कह पाता…
छिद्रान्वेषण के स्थान पर सत्यान्वेषण
छिद्रान्वेषण के स्थान पर सत्यान्वेषण ••••••••••••••••••••••••••••••••मैं किसी से भी मिलता हूँ तो उससे मुझे कुछ न कुछ प्रेरणा तो मिलता ही है. किसी भी व्यक्ति से मिलना वृथा तो गया ही नहीं….
ज्ञानगोचर और इन्द्रियगोचर
ज्ञानगोचर और इन्द्रियगोचर •••••••••••••••••••••••••••••••ज्ञानगोचर और इन्द्रियगोचर के संयुक्त रूप में मानव की पहचान है। सह-अस्तित्व अपने में ज्ञानगोचर है। सह-अस्तित्व समझे बिना मानव अपने में ज्ञानगोचर पक्ष को पहचान ही नहीं सकता….
मानवीय व्यवस्था’ के अध्ययन हेतु
इस प्रकार पूरी ‘अमानवीय व्यवस्था’ के विकल्प के रूप में मानवीय व्यवस्था’ के अध्ययन हेतु VIKALP CAMP 1-10 MARCH MANAV CHETNA VIKAS KENDRA, PIVDAY, INDORE सार्थकता के अर्थ में, विकल्प शिविर (1-10…
ज्ञान-दृष्टि
ज्ञान-दृष्टि ••••••••••••अन्तःकरण में इस बात की आवश्यकता महसूस होनी चाहिए कि जीव-चेतना में जीते हुए मानव का सार्थक जीने का स्वरूप नहीं बनेगा. पहला मुद्दा यही है. यह निष्कर्ष यदि निकलता है…
बंधन का स्वरूप
बंधन का स्वरूप (१) भ्रम ही बंधन है। जीवन भ्रमित होता है। जीवन में भ्रम आशा, विचार, और इच्छा के स्तर पर होता है। भ्रम (आशा बंधन, विचार बंधन, इच्छा बंधन) का…
संग्रह का तृप्ति बिंदु …..
संग्रह का तृप्ति बिंदु किसी भी देश-काल में किसी एक व्यक्ति को भी नहीं मिल पाया। संसार का हर मानव “समृद्धि” चाहता है और वो आहार-आवास-अलंकार संबंधी वस्तुओं के आधार पर हो…
जिज्ञासा और समाधान
जिज्ञासा और समाधान ••••••••••••••••••••••••➡️प्रश्न: मानव व्यवहार दर्शन में अध्यायों का जो क्रम है, उस क्रम का निर्धारण आपने कैसे किया? उत्तर: जिस क्रम में मैंने अनुभव किया था, उस क्रम में प्रस्तुत…