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पांच दिवसीय जीवन विद्या शिविर

Posted on December 13, 2023

🙏 सादर सूचना 🙏 शीतकालीन अवकाश मे 24 दिसंबर से 28 दिसंबर तक पांच दिवसीय जीवन विद्या शिविर 🙏”समाधान विद्यालय कबीर तीर्थ मंदरौद” 🙏 में सर्वसम्मति से होना तय हुआ है l🙏🏻जिनके…

मध्यस्थ दर्शन के मूल तत्व

Posted on December 12, 2023

मध्यस्थ दर्शन के मूल तत्व – भाग १••••••••••••••••••••••••••••••••••••••➡️प्रश्न: “मूल तत्व” से क्या आशय है? “तत्व” से आशय है – सत्य। “ मूल तत्व” का मतलब है – मूल में सत्य क्या है,…

प्रत्यक्ष और प्रमाण

Posted on December 11, 2023

प्रत्यक्ष और प्रमाण••••••••••••••••••••प्रमाण का स्वरूप है – अनुभव प्रमाण, व्यवहार प्रमाण, प्रयोग प्रमाण अनुभव में यदि सह-अस्तित्व दर्शन ज्ञान, जीवन ज्ञान, मानवीयता पूर्ण आचरण ज्ञान होता है तो अनुभव-प्रमाण है – अन्यथा…

Man to “Human” Transformational Workshop

Posted on December 10, 2023

पढ़ाई पहले से बेहतर,सड़कें भी पहले से बेहतर,मकान भी पहले से बेहतर,कपड़े भी पहले से बेहतर,गाड़ी-फोन…… भी पहले से बेहतर और सम्बन्ध…………??? फलस्वरूप लालच बढ़ा,झूठ भी बढ़ा,झगडे भी बढे,बीमारियां भी बढ़ी,वृद्धाश्रम भी…

घटनाएं मानव के लिये प्रमाणित एवं प्रामाणिक होने के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं।

Posted on December 10, 2023

“घटनाएं मानव के लिये प्रमाणित एवं प्रामाणिक होने के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं। प्रामाणिकता अनुभव है। प्रमाण शिक्षा है। प्रत्येक दुर्घटना में भी एक सद्घटना की कल्पना, कामना, आकाँक्षा एवं आवश्यकता का मानव…

समाधान के बिना समृद्धि का कल्पना भी नहीं किया जा सकता

Posted on December 9, 2023

समाधान के बिना समृद्धि का कल्पना भी नहीं किया जा सकता मध्यस्थ-दर्शन ने मानव-लक्ष्य को समाधान, समृद्धि, अभय, और सह-अस्तित्व के रूप में पहचाना है। हर मानव का यही लक्ष्य है। समाधान…

प्रश्न: कृपया परिवार के महत्त्व को समझाइये.

Posted on December 8, 2023

प्रश्न: कृपया परिवार के महत्त्व को समझाइये. उत्तर: परिवार संबंधों में जीने का स्वरूप है. संबंधों के नाम आपको विदित हैं. इन संबंधों का प्रयोजन समझ में आता है तो उनका निर्वाह…

बोलना कोई जीना नहीं है…..

Posted on December 6, 2023

बोलना कोई जीना नहीं है. जीने में समाधान ही होगा, समृद्धि ही होगा – और इसके अलावा कुछ भी नहीं होगा. बोलना एक ‘सूचना’ है. ‘जीना’ प्रमाण है. जीने में समाधान-समृद्धि ही…

Parichay Camp

Posted on December 6, 2023

आप क्या चाहते हैं?क्या ये आप वाकई जानते हैं,या अब तक सिर्फ मानते हैं,आइए मिलकर अपनी…असली चाहत को पहचानते हैं एक ऐसे कैंप में, जिसमें होगा…जिंदगी से जुड़े हर जवाब से आपका…

One- Day Orientation अभ्युदय संस्थान, अछोटी

Posted on December 6, 2023

सादर आमंत्रणOne- Day Orientationअभ्युदय संस्थान, अछोटी में_ क्यों जीना !! ; कैसे जीना !! __ विषय परएक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन ।।स्थान : मानवीय शिक्षा शोध संस्थान, (अभ्युदय संस्थान) अछोटी, जिला दुर्गदिनांक:…

समझदारी का प्रमाण

Posted on December 6, 2023

समझदारी का प्रमाण किसी आयु के बाद हर व्यक्ति अपने आप को समझदार माना ही रहता है। हर मनुष्य अपने ढंग से अपने को समझदार मानता है। जैसे कोई कहता है –…

देखने से, धर्म की…..

Posted on December 6, 2023

देखने से, धर्म की सउर देखने से पता लगता है अपराधियों के लिए ही ये सब बना हुआ है..धर्म तंत्र और राजतंत्र|क्योंकि अपराधियों को तारने वाला भी एक गुण तो मानव परंपरा…

इन्द्रिय सन्निकर्ष में ही ‘अनुभव होता है…….

Posted on December 5, 2023

“इन्द्रिय सन्निकर्ष में ही ‘अनुभव होता है’ ऐसा मानना और मनवाना, इसको लोकव्यापीकरण करने का सभी उपाय तैयार करना, साथ ही लाभोन्माद, कामोन्माद और भोगोन्मादी मानसिकता को कार्यशील, प्रगतिशील, विकासशील और अत्याधुनिक…

सम्पूर्ण सम्बन्धों में दया का प्रवाह होता है,,,,,

Posted on December 4, 2023

” सम्पूर्ण सम्बन्धों में दया का प्रवाह होता है। मनुष्य, मनुष्य के साथ, सम्बन्धों को जब पहचानता है तब सेवा, अर्पण-समर्पण करने की उमंग अपने आप उमड़ती है। शांतिपूर्ण मानसिकता के धरातल…

कल्पनाशीलता के आधार पर जिज्ञासा है।

Posted on December 4, 2023

कल्पनाशीलता के आधार पर जिज्ञासा है। जिज्ञासा ही पात्रता है। जिज्ञासा की प्राथमिकता के आधार पर ही ग्रहण होता है। जिज्ञासा की प्राथमिकता है या नहीं – इसको सटीक पहचानना अध्यापक का…

युवा शिविर

Posted on December 4, 2023

परिवार व्यवस्था में जीने के लिए अध्ययन एवं अभ्यासहेतुयुवा शिविर(श्री ए नागराज जी द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन सह- अस्तित्ववाद पर आधारित)25 दिसंबर – 1 जनवरी 2024मानव तीर्थ,छत्तीसगढ़ स्वयं में विश्वास, संबंधो में…

जीवन विद्या सार

Posted on December 3, 2023

जीवन विद्या सार सह-अस्तित्व सहज नियमों का जो मूल नियम है वो है, संपूर्ण द्रश्य-अद्रश्य/रुप-अरुप/भौतिक-अभौतिक/स्थूल-सूक्ष्म अस्तित्वसह-अस्तित्व के रुप में है, इसलिए हरपल-हरक्षण सह-अस्तित्व के द्रष्टिकोण के साथ जीना ही सह-अस्तित्व सहज मूल…

नियति विधि से नियम है

Posted on December 3, 2023

नियति विधि से नियम है नीति “नियति” से सम्बंधित है। नियति का अर्थ है – सह-अस्तित्व। सह-अस्तित्व नित्य प्रगटन-शील है। यही नियति है। साम्य-सत्ता में सम्पूर्ण जड़-चैतन्य प्रकृति क्रियाशील है। भौतिक-क्रिया, रासायनिक-क्रिया,…

आँखों से जो कुछ भी दिखता है वह किसी…..

Posted on December 3, 2023

“आँखों से जो कुछ भी दिखता है वह किसी वस्तु के रूप (आकार, आयतन, घन) में से आंशिक भाग दिखाई पड़ता है। रूप का भी सम्पूर्ण भाग आँखों में आता नहीं। जबकि…

सार्वभौम व्यवस्था

Posted on December 2, 2023

सार्वभौम व्यवस्था – सम्मलेन २००९, हैदराबाद==============>जय हो! मंगल हो! कल्याण हो! इस शुभ-कामना से हम यहाँ मिले हैं। आज मेरे वक्तव्य का मुद्दा है – “सार्वभौम व्यवस्था”। सार्वभौम व्यवस्था कैसे होती है?…

प्रश्न – मुक्ति

Posted on December 2, 2023

प्रश्न मुक्ति •••••••••••••७०० करोड़ मानवों के सभी प्रश्नों के लिए एक ही चाबी है। समझना है और प्रमाणित करना है – तो सभी प्रश्न ही समाप्त हैं। समझना नहीं है, प्रमाणित नहीं…

स्त्रोत की ओर ध्यानाकर्षण

Posted on December 1, 2023

स्त्रोत की ओर ध्यानाकर्षण जीवन विद्या योजना इस अनुसंधान की “सूचना” को जनसामान्य तक पहुंचाने का एक कार्यक्रम है. उससे लोगों में उत्साह होता है. उत्साहित लोगों को अध्ययन में लगाना चाहिए….

ऊर्जा

Posted on December 1, 2023

ऊर्जा•••••सभी संसार – एक परमाणु-अंश से लेकर परमाणु तक, परमाणु से लेकर अणु रचित रचना तक, अणु रचित रचना से लेकर प्राण-कोषा से रचित रचना तक – का क्रियाकलाप स्वयं-स्फूर्त होता हुआ…

तर्क का प्रयोजन

Posted on November 30, 2023

तर्क का प्रयोजन प्रश्न: तर्क क्या है? तर्क का प्रयोजन क्या है? उत्तर: तर्क का मतलब है क्यों और कैसे का उत्तर दे पाना । ऐसा तर्क एक प्रेरणा है । तर्क…

बुद्धि के साथ “विवेक” पूर्वक हम सुखी होते हैं.

Posted on November 30, 2023

बुद्धि के साथ “विवेक” पूर्वक हम सुखी होते हैं. ============================= बुद्धि के साथ सुखी होने की विधि है – विवेक। अविवेक पूर्वक हम दुखी होते हैं। विवेक के बारे हमें विगत में…

तन की प्यास पानी से बुझती है और मन(जीवन) की

Posted on November 30, 2023

तन की प्यास पानी से बुझती है और मन(जीवन) की प्यास अस्तित्वसहज वस्तुओं(वास्तविकताओं) में तदाकार होने पर ही बुझती है।तदाकार होने की स्थिति केवल अध्ययन से आता है। तदाकार से आशय है…

मानसिकता

Posted on November 29, 2023

मानसिकता••••••••••••••➡️ मानव परंपरा में यह विदित है कि मानव क्रियाकलाप के मूल में मानसिकता का रहना अत्यावश्यक है । मानसिकता विहीन मानव को मृतक या बेहोश घोषित किया जाता है । विकृत…

मानव जाति, मानव धर्म

Posted on November 29, 2023

मानव जाति, मानव धर्म मानव धर्म के बारे में, तीन आशय समाहित हैं| विकसित चेतना में जीता हुआ मानव, देव मानव, दिव्य मानव का अध्ययन है | चेतना के सन्दर्भ में चार…

न्याय दृष्टि जीवन में रहता ही है, पर जागृत नहीं हुआ रहता है

Posted on November 29, 2023

न्याय दृष्टि जीवन में रहता ही है, पर जागृत नहीं हुआ रहता है•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••• न्याय चाहिए, पर प्रिय-हित-लाभ के चंगुल से छुटे नहीं हैं. अभी हम न्याय को भी संवेदनाओं के साथ जोड़ते…

मध्यस्थ-क्रिया का स्वरुप

Posted on November 28, 2023

मध्यस्थ-क्रिया का स्वरुप मध्यस्थ-क्रिया वह है – जो सम और विषम से अप्रभावित रहता है, और सम और विषम क्रियाओं को संतुलित बना कर रखता है। इसके दो स्वरुप हैं। (१) परमाणु…

होना और रहना

Posted on November 28, 2023

होना और रहना “होना” अस्तित्व में प्रकटन विधि से है। अस्तित्व प्रयोजनशील है – इसलिए इसमें उत्ततोत्तर विकास-क्रम और जागृति-क्रम का क्रमिक-प्रकटन भावी है। इसी क्रम में – पदार्थावस्था समृद्ध होने पर…

जागृत मानव के अनुभव की वस्तु

Posted on November 27, 2023

जागृत मानव के अनुभव की वस्तु “जागृत मानव (दृष्टा पद) = “Awakened Human Being (The Seer) has: – Information Source–

ONE- DAY CRIENTATION

Posted on November 26, 2023

ONE- DAY CRIENTATION मध्यस्थ दर्शन सह-अस्तित्ववाद प्रणेता श्रद्धेय ए नागराज जी आधारित अभ्युदय संस्थान, अछोटी एवं समाधान महाविद्यालय, बेमेतरा के संयुक्त तत्वावधान में “शिक्षा में मानवीय मूल्यों का समावेश” विषय पर एक…

परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था

Posted on November 25, 2023

परिवार मूलक स्वराज्य व्यवस्था दस व्यक्तियों के समझदार परिवार में समाधान-समृद्धि का वैभव होता है। ऐसे दस समझदार परिवार एक-एक व्यक्ति को अपने में से निर्वाचित करते हैं, जो परिवार-समूह सभा को…

मध्यस्थ दर्शन सूत्र

Posted on November 23, 2023

नमस्ते जी जब संबंध नहीं है तो पैसा एकमात्र शरण है। जो चीज जिस काम के लिए बनी है उस चीज को उस काम के लिए उपयोग करना ही उसकी उपयोगिता है।…

सुखी एवं समृद्ध परिवार कार्यशाला*

Posted on November 22, 2023

सुखी एवं समृद्ध परिवार कार्यशाला* कहीं देर न हो जाए……. ……पारिवारिक रिश्ते “कोमा” में !! जिंदगी के शुरुआती 20 व अंतिम 10 साल परिवार में गुजारना मजबूरी। “बुढ़ापे में अपनों के बीच…

युवा शिविर

Posted on November 20, 2023

परिवार व्यवस्था में जीने के लिए अध्ययन एवं अभ्यासहेतुयुवा शिविर(श्री ए नागराज जी द्वारा प्रतिपादित मध्यस्थ दर्शन सह- अस्तित्ववाद पर आधारित)25 दिसंबर – 1 जनवरी 2023मानव तीर्थ,छत्तीसगढ़ स्वयं में विश्वास, संबंधो में…

परस्पर पहचान होना प्रकाशन का मतलब है.

Posted on November 18, 2023

परस्पर पहचान होना प्रकाशन का मतलब है. हर वस्तु के सभी ओर उसका प्रतिबिम्ब रहता है। क्योंकि हर वस्तु सीमित होता है। सीमित होने के आधार पर ही “एक” के रूप में…

मानवीय संविधान: परिचर्चा

Posted on November 16, 2023

मानवीय संविधान: परिचर्चा हर रविवार प्रातः 05:00 बजे से 06:00 बजे तक (दिनांक 19 नवम्बर से प्रारम्भ होकर 12 सप्ताह तक) सान्निध्य : श्री साधन भैया सादर अभिवादन🙏बताते हुए हमें बहुत प्रसन्नता…

समझने की प्रक्रिया

Posted on November 10, 2023

समझने की प्रक्रिया (1) समझना वस्तु है, शब्द नहीं है। अंततोगत्वा शब्दों से इंगित वस्तु को पहचानना है, या शब्द को पहचानना है? यह तय करना होगा। शब्दों को शब्दों से जोड़ते…

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“भूमि स्वर्गताम यातु
मनुष्य यातु देवताम्:
धर्मो सफलताम यातु
नित्यं यातु शुभोदयम्I “

-A.Nagraj, Propounder- Madhyasth Darshan

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