समझदारी से सोचा जाए! संसार में मानव परंपरा है. मानव परंपरा ज्ञान-अवस्था में है. इसके प्रमाण में मानव ने अपना भाषा विकसित किया. भाषा को ज्ञान के स्वरूप में ही माना. इस…
संबंध
संबंध “संबंध” की परिभाषा है – पूर्णता के अर्थ में अनुबंध(प्रतिज्ञा)। पूर्णता का मतलब है, – क्रिया-पूर्णता और आचरण-पूर्णता. क्रिया-पूर्णता और आचरण-पूर्णता व्यवस्था के रुप में ही प्रमाणित होता है. इस तरह…
जीवन विद्या परिचय शिविर धनोरा हापुड़ 2023
घोषणाछुट्टियां खुशी के पल होते हैंपर क्या हमें यह पता है कि खुशी क्या होती है?आइए इस ठंडी की छुट्टियां इसके ही अन्वेषण (Exploration) में लगायेंपारिवारिक खुशहाली शिविर(Family Happiness Workshop)स्रोत: मध्यस्थ दर्शनप्रणेता:…
अर्थ को समझना हर व्यक्ति के बलबूते का है।
अर्थ को समझना हर व्यक्ति के बलबूते का है। जीवन में स्वयं से कोई चीज छुपा नहीं है। शरीर को जब तक जीवन माने रहते हैं, जीवन छुपा ही रहता है। जीवन…
प्रमाण
शास्त्र को सर्वोपरि प्रमाण मानने तक पहुंचा है – मानव को प्रमाण नहीं माना। यही मुख्य बात है. सह-अस्तित्व वादी विधि से शिक्षा व्यवस्था में जीने के अर्थ में है। स्थिरता और…
संपृक्तता, क्रियाशीलता, प्रगटन-शीलता
संपृक्तता, क्रियाशीलता, प्रगटन-शीलता~~~~ हर परस्परता के बीच जो रिक्त-स्थली है, वही व्यापक-वस्तु है। इकाइयों के बीच अच्छी दूरी होने का प्रयोजन है – एक दूसरे की पहचान होना। पहचानने का प्रयोजन है…
सहज और कृत्रिम
सहज और कृत्रिम प्रश्न: “सहज” शब्द से क्या आशय है? उत्तर: सहज से आशय है – मानव को जिसे बनाना नहीं है. सभी व्यवस्था सहज है. नियम सहज है. जीवन सहज है….
आहार-विहार-व्यवहार
आहार-विहार-व्यवहार आहार-विहार-व्यवहार द्वारा मानव अपनी स्वस्थ-मानसिकता का प्रदर्शन करता है|आहार से आशय है – खान-पान, जैसे – शाकाहार-दुग्धपान या माँसाहार-मद्यपान.विहार से आशय है – रहन-सहन, जैसे – ओढ़ना-पहनना, मनोरंजन, व्यायाम, खेल-कूद, घूमना…
क्रिया के प्रकार क्या है ?
1) क्रिया के प्रकार क्या है ? प्रकृति क्रिया स्वरूप है। क्रिया का मूल स्वरूप परमाणु है। भौतिक क्रिया, रासायनिक क्रिया, जीवन क्रिया – ये तीन प्रकार की क्रिया होती है। सारी…
2 वर्षीय अध्ययन शिविर
2 वर्षीय अध्ययन शिविर मान्यवर,सूचना: अभ्युदय संस्थान, अछोटी में –2 वर्षीय अध्ययन शिविर घोषणा (वर्ष 2024-25)(सेशन-1: फरवरी माह 2024 (दिनांक: 10 फरवरी 2024 से 18 फरवरी 2024 तक))(सेशन-2: अप्रेल माह 2024); (सेशन-3:…
जीवन विद्या परिचय कार्यशाला 2023
“मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववाद” के प्रणेताश्रद्धेय ए. नागराजजी द्वारा प्रतिपादित,जीवन विद्या परिचय कार्यशाला गहन अनुसंधान के आधार पर जीवन के उद्देश्य और इसे पाने के पथ की स्पष्ट समझ। सदा सुखी रहने के…
प्रचार-माध्यमों की सार्थकता
प्रचार-माध्यमों की सार्थकता आज सभी प्रचार-माध्यम अपराध-गतिविधियों को ज्यादा से ज्यादा प्रचारित किया करता है। प्रचार-माध्यम का मूल स्वरूप सही-गलती को चेताने से है, अथवा स्पष्ट करने से है। इसमें से “गलती”…
जीवन विद्या
जीवन विद्या मध्यस्थ दर्शन ( सहअस्तित्ववाद) मैं जीवन एवं शरीर के संयुक्त रूप में मानव हुँ। (भ्रम मुक्ति) जीवन में मैं आत्मा (मध्यांश) हूँ मन, वृत्ति, चित्त, बुद्धि मेरा है। (गठनपूर्णता) मुझे…
जीवन विद्या परिचय शिविर, बांदा उत्तर प्रदेश 2023
मानव में : परिवार समाज व्यवस्था, मूल चरित्र नीति, व्यवसाय समाज प्रकृति, कार्य व्यवहार विचार अनुभव, जड़ चैतन्य व्यापक, भौतिक रासायनिक व चैतन्य क्रिया, न्याय धर्म सत्य का अर्थ एवं महत्व जानने…
जड़ और चैतन्य
जड़ और चैतन्य~~जड़-प्रकृति और चैतन्य-प्रकृति दोनों गतिशील/क्रियाशील हैं – लेकिन दोनों की मौलिकताएं अलग-अलग हैं। चैतन्य-प्रकृति में परावर्तन और प्रत्यावर्तन दोनों हैं, जबकि जड़ प्रकृति में केवल परावर्तन है। परावर्तन का मतलब…
पारिवारिक खुशहाली शिविर
घोषणा छुट्टियां खुशी के पल होते हैंपर क्या हमें यह पता है कि खुशी क्या होती है?आइए इस ठंडी की छुट्टियां इसके ही अन्वेषण (Exploration) में लगायेंपारिवारिक खुशहाली शिविर(Family Happiness Workshop)स्रोत: मध्यस्थ…
ज्ञान
ज्ञान मानव में ऊर्जा-सम्पन्नता ज्ञान के रूप में है। भ्रमित रहते तक ऊर्जा का प्रयोग मनुष्य चार विषयों और पांच संवेदनाओं के रूप में करता है। जागृत होने पर ऊर्जा का प्रयोग…
Jeevan Vidya A Workshop on Coexistence
Jeevan Vidya: A dialogue based exploration of Coexistence:10 Day Introductory Workshop in English.Location: Dharwad, Karnataka (Near Hubli)Dates: 24th December 2023 – 02 January 2024Faciliator: Shriram Narasimhan.REGISTER: https://bit.ly/jvengTOPICS• Mind & Reality More Info…
अभ्युदय संस्थान, अछोटी में जीवन विद्या परिचय शिविर
मान्यवर,🙏अभ्युदय संस्थान, अछोटी में जीवन विद्या परिचय शिविर के लिए.. आरक्षित करें अपना समय🙏.सूचना- अस्तित्व मूलक मानव केन्द्रित चिंतन मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्ववाद पर आधारित जीवन विद्या परिचय शिविरप्रबोधक: सुरेन्द्र पाल भैयादिनांक:…
मूल्यों की समझ
मूल्यों की समझ “अस्तित्व में परस्परता में सम्बन्ध हैं ही| अस्तित्व में हर वस्तु प्रयोजन सहित ही है| सम्बन्ध को उनके प्रयोजन को पहचान कर निर्वाह करते हैं तो उनमे निहित मूल्यों…
जीवनविद्या अध्ययन शिविर
ज्ञानोत्सव जीवनविद्या अध्ययन शिविर पुस्तक : आवर्तनशील अर्थशास्त्र दिनांक: 20,21,22 ऑक्टोम्बर -2023समय- 10:00 AM -6:00 PM प्रबोधक: सुरेंद्र पाठक जी जो मित्र शिविर में आ रहे है वो कृपया पहले से अवगत…
समझना और कार्य-करना
समझना और कार्य-करना शब्द के अर्थ को मानव ही समझता है। मानव ही अपनी समझ के अनुसार कार्य करता है। समझना” और “कार्य करना” ये दो भाग हैं। “कार्य करने” के पक्ष…
कृतज्ञता दिवस समारोह
Kritagyata Divas_Invite आमंत्रण, ‘कृतज्ञता दिवस समारोह Registration Link: bit.ly/23Kritagyata दिनांक: कार्तिक पूर्णिमा, 27 नवंबर 2023 स्थान: मानवतीर्थ, ग्राम किरितपुर, जि बेमेतरा, छ.ग. आप को आमंत्रित करते हुए अतंत्य हर्ष हो रहा है…
संस्कार और प्रारब्ध
संस्कार और प्रारब्ध°°°°°°°°°°°°°°°°°° ➡️ संस्कार क्या है? मानव जाति में अभी संस्कार का क्या स्वरूप है? मानव जाति में अभी तक संस्कार बना ही नहीं है. संस्कार अभी भाषा रूप में है….
अमूर्त और मूर्त
अमूर्त और मूर्त मनुष्य-शरीर को जीवन चलाता है। ऐसे मनुष्य-शरीर को चलाते हुए जीवन ‘अमूर्त’ वस्तुओं की अपेक्षा में जीता है। सुख एक अमूर्त वस्तु है। सुख को मूर्त वस्तुओं (भौतिक-रासायनिक) में…
मानव सहज-अपेक्षा स्वतन्त्र रहने की है.
मानव सहज-अपेक्षा स्वतन्त्र रहने की है. मानव-परम्परा में जो कुछ भी भौतिक वस्तुओं की “प्राप्तियां” हुई वे “सुखी होने” के लिए प्रयत्न करने के क्रम में ही हुई। वस्तुओं से “सुखी” होने…
निरन्तर शुभोदय का उदय
“अमानवीय मानव कितना भी रूपवान, बलवान, धनवान एवं पदवान हो जाय, वह अजागृत के जागृति के लिए सहयोगी नहीं हो पाता है। इसके विपरीत में मानवीयता एवं अतिमानवीयता पूर्ण मानव कितना भी…
ज्ञान और प्रमाण
ज्ञान और प्रमाण जितना हमें ज्ञान होता है वह पूरा प्रमाणित होता ही नहीं. जैसे – समुद्र की एक बूँद का परीक्षण करके हम प्रमाणित करते हैं. समुद्र का सारा पानी वैसा…
अध्ययन शिविर इंदौर
Namaste 🙏, Greetings from Manav Chetna Vikas Kendra..🌸 जैसा की आप जानते ही है मानव, सच्चाइ को समझ कर ही सुखी होता है। मानव की अज्ञानता ही उसके दुखी होने का मूल…
अभी तक की सोच का विकल्प
अभी तक की सोच का विकल्प मनुष्य-जाति के इतिहास में अभी तक जो भी प्रयास हुए, वे उसको समझदारी के घाट पर पहुंचाने में असमर्थ रहे। पहले आदर्शवाद ने “आस्था” या मान्यता…
सत्य – ज्ञान – प्रमाण भाग – २
सत्य – ज्ञान – प्रमाण भाग – २ समझदारी से ही समाधान होना प्रमाणित होता है। नासमझी से ही सारी समस्याएं होती हैं। जो समझदार होते नहीं है पर स्वयं को समझदार…
न्याय और व्याख्या
न्याय और व्याख्या न्याय का स्वरूप मानव-संबंधों में स्पष्ट होता है। मानव द्वारा अपनी परस्परता में संबंधों को पहचानना एक साधारण प्रक्रिया है। “पिता”, “माता”, “भाई”, “बहन” ये नाम से परस्परता में…
धर्म और व्याख्या
धर्म और व्याख्या “धर्म” शब्द एक वेद-कालीन या बहुत प्राचीन-कालीन उपलब्धि है। प्राचीन काल से “धर्म” शब्द का प्रयोग होता आया है। विविध प्रकार से धर्म-गद्दियाँ स्थापित हुई। इस धरती पर जितनी…
स्वत्व समझ ही है.
स्वत्व समझ ही है. हर मनुष्य में “स्वत्व” समझदारी के रूप में समीचीन है। समझदारी या तो प्रमाण के रूप में आ गया है, या फ़िर समीचीन है। समीचीन का मतलब निकटवर्ती…
निरंतर खुशी सहज खुशी
जीवन विद्या संवाद गोष्टी निरंतर खुशी सहज खुशी .मानव खुश होने के लिये सुविधा जुटाता है और अपने शरीर और धरती को बीमार कर बैठता है । • मानव खुश होने के…
दासत्व से मुक्ति
दासत्व से मुक्ति दासत्व से मुक्ति स्वावलंबन से आता है. स्वावलंबन समाधान से आता है. स्वावलंबन की चर्चा कब से हो रही है – पर क्या स्वावलंबन हो पाया? अभी कुछ भी…
पिछली शरीर यात्रा का अगली शरीर यात्रा पर प्रभाव
पिछली शरीर यात्रा का अगली शरीर यात्रा पर प्रभाव प्रश्न: पिछली शरीर यात्रा का अगली शरीर यात्रा पर क्या प्रभाव पड़ता है? उत्तर: पिछली शरीर यात्रा में जो पराभव से त्रस्त रहे,…
जीवन विद्या परिचय कार्यशाला गुजरात 2023
“मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववाद” के प्रणेताश्रद्धेय ए. नागराजजी द्वारा प्रतिपादित,जीवन विद्या परिचय कार्यशाला गहन अनुसंधान के आधार पर जीवन के उद्देश्य और इसे पाने के पथ की स्पष्ट समझ। सदा सुखी रहने के…
व्यवस्था का मूल स्वरूप
व्यवस्था का मूल स्वरूप~~~परमाणु-अंश में आचरण निश्चित नहीं होता। किसी गठन से पृथक होने पर परमाणु-अंश किसी एक तरह का आचरण नहीं करता, उसका आचरण बदलता रहता है। गठन से पृथक परमाणु-अंश…
जीवन विद्या परिचय कार्यशाला गुजरात 2023
“मध्यस्थ दर्शन सहअस्तित्ववाद” के प्रणेताश्रद्धेय ए. नागराजजी द्वारा प्रतिपादित,जीवन विद्या परिचय कार्यशाला गहन अनुसंधान के आधार पर जीवन के उद्देश्य और इसे पाने के पथ की स्पष्ट समझ। सदा सुखी रहने के…