●●● प्रश्न मुक्ति शिविर ●●●
● प्रबोधक : डॉ श्याम
● दिनांक : 25 दिसंबर से 1 जनवरी (8 दिन)
सामूहिक जरूरत पर तारीखों को थोड़ा आगे-पीछे करना संभव।
● स्थान : भीलवाड़ा (राजस्थान)
● पात्रता : जीवन विद्या के कुछ प्रबोधकों के शिविरों का श्रवण/ वांग्मय का कुछ पठन किए 1 साल से पुराने साथी
● कॉमन सवाल/जिज्ञासाएं :–
1) संस्कृत निष्ट हिंदी में लिखी वांग्मय पुस्तकों को आसानी से पढ़ने-समझने हेतु कुछ सूत्र ?
2) गति बढ़ाने हेतु “अध्ययन प्रक्रिया” की बारीकियां – Offline & Online शिविर और घर पर ?
3) भागमभाग की जिंदगी में व्यवहाराभ्यास-कर्मभ्यास क्या और कैसे ?
4) जीवन विद्या शिविर करने के बाद घर-दोस्तों के बीच भाषा बदलने से घटता संवाद ?
5) मध्यस्थ दर्शन में स्वयं से लेकर अस्तित्व समग्र तक के पूरे तर्क हमारी भाषा में आ जाने से पुष्ट होते अहंकार से बचने के उपाय चूंकि “ज्ञान मार्ग” में विफलता का ये सबसे बड़ा कारण रहा है ?
6) स्वयं के अधिमूल्यन तथा दूसरे के अवमूल्यन से बढ़ता संबंधों में खिंचाव।
मूल्यांकन सही किया या गलत, कैसे पता चले ?
7) दिनभर हर क्षण अपने भाव-विचार को देखते रहने का आसान तरीका ?
8) परिवार के बाहर भागीदारी बिना “अध्ययन” क्यूं नहीं पूरा हो सकता ? जागृति हेतु कब से सामाजिक भागीदारी शुरू करें ?
9) संज्ञानियता की इस यात्रा में संवेदनशीलता जरूरी लेकिन पर्याप्त नहीं। नियंत्रित संवेदना का मतलब संवेदनहीनता नहीं है, इसे और स्पष्ट करें ?
10) समृद्धि की सिर्फ परिभाषा समझ में आई है या समृद्धि जीने में भी आई है, आकलन के पैमाने क्या-क्या ?
11) अलग-अलग प्रबोधकों को सुनने के फायदे
12) “विकल्प” और “परंपरा के प्रति कृतज्ञता” में संतुलन बनाए रखने हेतु सावधानियां बताएं ताकि अखंड समाज के लिए शुरू हुई हमारी बात एक नए खंड (समुदाय) तक सिमट न जाए ?
13) आदरणीय नागराज जी के अनुसार प्रतीक प्राप्ति नहीं। ऐसे प्रतीक स्थान, जाति, भाषा, कला, चित्र, रचना, प्रतिमा, स्मारक और शब्द के भेदों से गण्य हैं।
इसे विस्तार से समझाए चूंकि प्रतीकों में उलझने का हमारा पिछली कई शरीर यात्राओं का इतिहास ही नहीं बल्कि वर्तमान भी है ?
14) हर सप्ताह देश-दुनिया की बड़ी घटनाओं/समस्याओं पर मध्यस्थ दर्शन की रोशनी में सर्वोतोमुखी समाधान के सार्वजनिक प्रस्ताव हेतु सामूहिक प्रयास (व्यक्ति केन्द्रित नहीं) का शुभारंभ कैसे करें ?
15) अन्य कोई भी प्रश्न/जिज्ञासा…….. ?
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● अनुरोध : सर्दी की छुट्टियों के चलते रेलवे रिजर्वेशन अभी करवा लें।
● डॉ श्याम द्वारा 400 युवाओं को दिल्ली में दिया अविस्मरणीय उद्बोधन :–
● इस मैसेज को जीवन विद्या के सभी ग्रुप में फॉरवर्ड करने की विनती।