💢 स्वतन्त्रता “अनुभव दर्शन से”
◘ क्लेश ही दास्यता है। यह अजागृति का प्रतीक है। उससे मुक्ति ही स्वतंत्रता का लक्षण है।
◘ स्वकर्म-परिपाक संस्कार अध्ययन एवं वातावरण ही स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के कारण है।
◘ जागृत मानव में स्वतंत्रता ही समाधान, समाधान ही समत्व, समत्व ही सहज समाधि, सहज समाधि ही आनंद, आनंद ही जीवन जागृति, जागृति ही स्वतंत्रता है।
◘ जड़ प्रकृति के साथ नियम पूर्वक उत्पादन, समाज में न्याय पूर्वक व्यवहार, स्वयं में समाधान पूर्ण विचार एवं सत्ता में अनुभवपूर्ण क्षमता से संपन्न होना ही मानव इकाई का परम जागृति है। यही स्वतंत्रता का आद्यान्त लक्षण है।
स्वतंत्र मानव इकाई जागृति सहज प्रमाण है तथा अन्य उसका अनुसरण करने में या पूर्ण जागृति के निकट है।
जागृति पूर्ण मानव इकाई अन्य के अभ्युदय के लिए सहायक है।
स्वतंत्र मानव इकाइयों की संख्या वृद्घि हेतु मानवीयता सहज व्यवहार उत्पादन तथा व्यवस्था का अध्ययन व आचरण की एकसूत्रता आवश्यक है।
◘ जड़ता के प्रति आसक्ति स्वतंत्रता का लक्षण नहीं है। उससे मुक्ति के लिए उपदेश है, यह जाग्रित के लिए प्रेरणा है।
प्रत्येक मानव स्वतंत्र होना व रहना चाहता है।
अनुभवसमुच्चय ही स्वतंत्रता है। दर्शनसमुच्चय पूर्वक कार्यक्रम-समुच्चय का अनुसरण करना ही साधना है। फलत: अनुभव है।
◘ स्वतंत्रता ही अजेयत्व एवं अनुभव ही अमरत्व है। यही क्रम से सतर्कता एवं सजगता है जिसके लिए ज्ञानात्मा प्यासी है।🙏