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सहपठन कार्यक्रम के लिए प्रस्तावित “10 दिवसीय किताब-सहपठन” हेतु आपके इंटरेस्ट का पता करने हेतु यह पोस्ट है…
वांगमय का सहपठन कार्यक्रम
प्रस्तावित दिनांक व किताब –
दिनांक 5 से 15 मार्च 2024 //
मानव संचेतना वादी मनोविज्ञान //
@ Abhyuday Sansthan, Achhoti
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वांगमय का सहपठन कार्यक्रम विवरण :
इसका डिजाइन कुछ इस प्रकार हो सकता है
जिसमें सुबह 9:00 से 1:00 – अपनी अपनी बात रखना, अपनी अपनी समझ को रखना या अपनी अपनी जिज्ञासा को रखना किया जाएगा। दोपहर का भाग ग्रुप रीडिंग के रूप में हो जाएगा।
रात को एक ओपन गोष्टी बाहर से आए हुए लोगों के बीच में आयोजन हो सकता है। विगत कई समय से कभी भी- कोई भी किताब पढ़ने का अवसर मिसिंग सा लगता है, वह भी इससे पूरा हो जाएगा।
पूरा कार्यक्रम प्रबोधक मुक्त रख कर / सभा खुद से ही एक दूसरे से समझने समझाने का मौलिक डिजाइन बना लिया करेगी। संस्थान का प्रयोजन इस प्रकार के कार्यक्रमों से निरंतर बना रहे/ चहल पहल बनी रहे। पुराने पठन किए हुए लोग/ वरिष्ठ लोग इसमें इंगेज हो सकते हैं, ऐसा अनुमान बनता है। ऐसा इस कार्यक्रम से हो पाएगा।
यह सारा कुछ एक प्रस्ताव ही है एक बार कर के देखते हैं, कहीं कुछ हो सके तो!!
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संपर्क:
चंद्रशेखर राठौर भैया 9893025307 (whatsapp/call) 9301625307 (call),
मंजीत भैया 9981186657 (call), 9301359227 (whatsapp)
धन्यवाद🙏

सहपठन कार्यक्रम
संस्थान में शिविरों के बीच में बन रहे लंबे गैप (19 फरवरी से 24 मार्च लगभग 36 दिन का गैप है) को भरने और संस्थान के potential (ससक्त संभावना का) सार्थक रूप से उपयोग करने के अर्थ में एक किताब सहपठन कार्यक्रम प्रस्तावित है, जिसमें शिविरों के बीच में जो लंबे गैप बनते हैं उसमें किसी भी क्रम से चयनित किताब का सहपठन कार्यक्रम आयोजित किया जाए,
जिसमें उस वांगमय को सहपठन करने का प्रस्ताव जो इच्छुक लोग हैं, के साथ यह 10 दिवसीय सहपठन कार्यक्रम को किया जाए। इसे शिविरों के बीच में बन रहे लंबे गैप में ही किया जाए।

वांगमय का सहपठन कार्यक्रम
अभी देखें तो 18 फरवरी से 24 मार्च लगभग 34 दिन का गैप है जिसमें की कोई कार्यक्रम नहीं है। पूरा संस्थान नीरस सा हो गया है, ऐसे सहपठन कार्यक्रमों को करने से किचन भी इंगेज रहेगा, साथ ही संस्थान परिवार और आसपास रहने वाले परिवार में जो भी सदस्य इस प्रकार के पठन कार्यक्रम को अटेंड करना चाहें, उनके लिए भी यह अवसर बनेगा।

इसका डिजाइन कुछ इस प्रकार हो सकता है
वांगमय को सहपठन करने का प्रस्ताव समाज के सामने भी रखा जाए, और जो इच्छुक लोग हैं, के साथ यह 10 दिवसीय सहपठन कार्यक्रम को किया जाए। इसे शिविरों के बीच में बन रहे लंबे गैप में ही किया जाए।
01 प्रतिदिन सुबह 9:00 से 1:00 अपनी अपनी बात रखना, अपनी अपनी समझ को रखना या अपनी अपनी जिज्ञासा को रखना किया जाएगा। दोपहर का भाग ग्रुप टीडिग के रूप में हो जाएगा।
02 रात को एक ओपन गोष्टी (बाहर से आए हुए लोगों के बीच में) आयोजन हो सकता है। विगत कई समय से कई बार कभी-कभी कोई भी किताब पढ़ने का अवसर मिसिंग मा लगता है, वह भी इससे पूरा हो जाएगा।
03 पूरा कार्यक्रम प्रबोधक मुक्त रख कर / सभा खुद से ही एक दूसरे से समझने समझाने का मौलिक डिजाइन बना लिया करेगी। संस्थान का प्रयोजन इस प्रकार के कार्यक्रमों से निरंतर बना रहे / चहल पहल बनी रहे। साथ ही, पुराने पठन किए हुए लोग / वरिष्ठ लोग इसमें इंगेज हो सकते हैं, ऐसा अनुमान बनता है। ऐसा इस कार्यक्रम से हो पाएगा।
यह सारा कुछ एक प्रस्ताव ही है, एक बार कर के देख सकते हैं, कहीं कुछ हो सके तो!!
नमस्ते
24-02-2024 एक प्रस्ताव